सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए पाठशालाओं में संस्कार तथा अध्यात्मिक विषय की पढ़ाई का होना बेहद जरूरी है। उच्च शिक्षा चाहे कितनी भी ग्रहण कर लें मगर जब तक बच्चों को संस्कार तथा अध्यात्मिक शिक्षा का ज्ञान न हो तब तक बच्चों के जीवन में निखार नहीं आएगा।
चौहार घाटी की बरोट पंचायत के थूजी गाँव के समाज सेवक रामसरन चौहान तथा कथयाडू गाँव के बुद्धिजीवी तेज़मल ठाकुर का कहना है कि जिस तरह बच्चों को पाठशालाओं में अन्य विषयों की पढ़ाई करवाई जाती है उसी तर्ज पर बच्चों को पहली कक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्कार व अध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करना बहुत जरूरी है।

इन दोनों विषय की पढ़ाई पहली कक्षा से चालू करने से बचपन से बच्चों का आधार मजबूत होगा। संस्कार तथा अध्यात्मिक शिक्षा का ज्ञान होने से बच्चे विद्यार्थी जीवन से इधर –उधर जाकर बुरी संगत में नहीं पडेगे तथा नशे आदि की लत से भी दूर रहेगे।
उन्होंने कहा कि माता – पिता को भी चाहिए की घरों में भी बच्चों की पूरी निगरानी रखें और अच्छा पालन- पोषण करने के साथ उनमें अच्छे संस्कार देना भी बेहद जरूरी है। आज के बच्चे कल का भविष्य है। अगर बच्चों को संस्कारित व आध्यात्मिक बनाया जाए तो उनका भविष्य सुनहरा होगा।
आज के आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के चलते हम सदियों से चली आ रहे संस्कारों को भूलते जा रहे है जिससे बच्चे गलत दिशा की ओर जा रहे है। आज समय की भी यही मांग है कि सरकार को ऐसी शिक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर पहल करनी चाहिए तथा पहली कक्षा से संस्कार व आध्यत्मिक विषयों पर शिक्षा का प्रावधान करवाना जरूरी है। ऐसा करने से बच्चे शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार तथा अध्यात्मिक गुणों से भी परिपूर्ण हो सकेंगे।










