सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 28 नवम्बर
गीता आश्रम कुल्लू के अनुयायी अभिनव वशिष्ट ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आज 35वें गीता जयंती समारोह का आयोजन गीता कुटीर रामशिला में आयोजित किया। उन्होंने बताया कि यह वार्षिक समारोह ब्रह्मलीन स्वामी आराधना “भिक्षु” की पावन स्मृति में आयोजित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस जयंती समारोह में स्कूली बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगितायें आयोजित की गई। इन प्रतियोगितायों में वाद-विवाद प्रतियोगिता में ला मॉन्टेसरी स्कूल, ढालपुर की रिधिमा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि ट्रिनिटी स्कूल, मोहल के भुवनेश ने चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। दोनों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और क्रमशः ₹3,100 तथा ₹2,001 की नकद राशि प्रदान की गई। सरस्वती विद्या मंदिर, बाशिंग की संस्कृति द्वितीय स्थान पर रही और उसे ₹2,100 का पुरस्कार मिला, जबकि भारत भारती स्कूल, ढालपुर की इशिता तृतीय स्थान पर रही और उसे ₹1,100 प्रदान किए गए। वाद-विवाद प्रतियोगिता में घाटी के 26 विद्यालयों से 42 प्रतिभागियों ने भाग लिया। चित्रकला प्रतियोगिता में पीएम श्री जीएसएसएस, सुल्तानपुर की परविना द्वितीय स्थान पर रही और उसे ₹1,501 मिले, जबकि कुल्लू वैली स्कूल, अखाड़ा की सन्विका तृतीय स्थान पर रही और उसे ₹1,001 प्रदान किए गए। इस प्रतियोगिता में कुल 39 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
जीएसएसएस, ढालपुर के विशाल शर्मा और ब्यास संस्कृत महाविद्यालय, सुल्तानपुर की साक्षी को वाद-विवाद प्रतियोगिता में ₹500 के सांत्वना पुरस्कार दिए गए। देव भूमि स्कूल, कुल्लू की सिमरन को चित्रकला प्रतियोगिता में सांत्वना पुरस्कार मिला। दोनों प्रतियोगिताओं में सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि दयानंद गौतम ने वाद-विवाद प्रतियोगिता की थीम की सराहना की, जिसमें प्रतिभागियों को भगवद्गीता के अठारह अध्यायों में से किसी भी श्लोक की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करनी थी और उसके आधुनिक जीवन में महत्व को स्पष्ट करना था। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ न केवल वाक्-कला में निपुणता प्रदान करती हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और विरासत के गहन ज्ञान को भी बढ़ावा देती हैं।
गीता तपोभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष अमन सिंह सूद ने छात्रों की उत्साही भागीदारी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों ने श्रीकृष्ण–अर्जुन संवाद विषय पर सुंदर चित्र बनाए। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि अगले वर्ष इस आयोजन को और बड़े स्तर पर किया जाएगा।
गीता आश्रम के अनुयायी देवेश मिश्रा ने बताया कि सद्गुरुदेव स्वामी गीतानंद जी “भिक्षु” के आशीर्वाद से यह वार्षिक उत्सव ब्रह्मलीन स्वामी आराधना “भिक्षु” की पावन स्मृति में आयोजित किया जाता है। स्वामी आराधना “भिक्षु” ने अपना संपूर्ण जीवन भगवद्गीता के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष के आयोजन की प्रेरणा स्वामी मुक्तानंद “भिक्षु” और स्वामी किरण “भिक्षु” से मिली है।











