सुरभि न्यूज़
परस राम भारती, तीर्थन घाटी गुशेनी बंजार
जिला कुल्लू के सराज बंजार क्षेत्र में लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच तीर्थन घाटी में गांवों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस पहल शुरू हुई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय वासिओं ने मिलकर मॉडल एवं स्मार्ट गांव विकसित करने का संकल्प लिया है। इसका उद्देश्य सिर्फ विकास नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन सतत आजीविका और सामुदायिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
आपदा-सुरक्षित गांवों की ओर सामूहिक कदम
स्थानीय लोगों, युवा स्वयंसेवकों और संस्थानों के साझा प्रयास से इस अभियान में सृष्टि को-ऑपरेटिव सोसायटी के प्रतिनिधि प्रताप ठाकुर व भोपाल ठाकुर, तीर्थन घाटी बिष्ट निवास के संचालक महिंदर बिष्ट तथा निफ्ट कांगड़ा के स्वयंसेवक आयशा, नमन और आरुषि सिंह सक्रिय रूप से जुड़े हैं। सभी का साझा उद्देश्य है,गांवों को आपदा के पहले तैयार करना।
ग्रामीणों से सीधा संवाद, राहत और भरोसा
हिमालयन वॉलंटियर टूरिज़्म से जुड़े स्वयंसेवक प्रिक्षित क्राइस्ट यूनिवर्सिटी लवासा और आदीश थापर यूनिवर्सिटी पटियाला ने आगजनी से प्रभावित झनियार गांव का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं जानीं और राहत सामग्री वितरित की। इस दौरान 17 प्रभावित परिवारों को 2 लाख 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता चेक के माध्यम से दी गई, जिससे आपदा के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल सके।
हाल ही में पेखडी गांव आगजनी की घटना ने सब की आंखें खोल दी है, यदि यह घटना दिन के समय होती तो गांव का इतिहास मिट सकता था। पेखडी गांव में रात के समय लगी आग ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। ग्रामीणों की तत्परता, सड़क और जल स्रोतों की उपलब्धता तथा सामूहिक प्रयासों से बड़ा नुकसान टल गया। स्वयंसेवकों का कहना है कि यदि यह आग दिन के समय लगती, तो सदी पुराना गांव पूरी तरह तबाह हो सकता था।
इससे पहले झनियार और तांदी गांवों में हुई भारी तबाही ने भी साफ कर दिया कि अब आपदा-सुरक्षित मॉडल गांव समय की जरूरत बन चुके हैं।
एक साल में अनुकरणीय मॉडल गांव बनाने का लक्ष्य
सनशाइन हिमालयन कॉटेज के संस्थापक पंकी सूद ने कहा कि सामूहिक सोच, स्थानीय भागीदारी और विशेषज्ञों के सहयोग से एक वर्ष के भीतर एक प्रभावी मॉडल गांव विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि जनिहार के लोग सहमत होते हैं, तो वहां मॉडल फार्म गांव की अवधारणा पर काम शुरू किया जाएगा।
स्वयंसेवक निभाएंगे नेतृत्व, सरकार पर बोझ नहीं
पंकी सूद ने स्पष्ट किया कि यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वयंसेवकों द्वारा निःशुल्क संचालित होगा। इसके लिए आवश्यक संसाधन फंडरेज़िंग और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से जुटाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य सरकार पर निर्भरता घटाते हुए स्थानीय क्षमता निर्माण करना है।
हिमालय के गांवों के लिए नई राह
यह पहल केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक रोडमैप बन सकती है। आपदा-तैयारी, पर्यावरण संतुलन, स्थानीय रोजगार और सामुदायिक भागीदारी को जोड़ती यह सोच भविष्य में अन्य पर्वतीय गांवों के लिए भी मिसाल बनने की क्षमता रखती है।










