चौहार घाटी तथा छोटा भंगाल के पांच प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में कर रहे निस्वार्थ समाज सेवा – बणवीर राणा

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सुरभि न्यूज़

ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सोजन्य से संघ के बरोट खंड द्वारा मेला मैदान मुल्थान में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया।  सम्मलेन का आगाज़ घाटी के आराध्य देव गहरी नेर द्वारा किया गया। सम्मेलन में दोनों घाटी के 25 महिला मंडलों सहित लगभग तीन हज़ार दर्शकों ने देव गहरी नेर के जयकारा लगाते हुए पुष्पवर्षा करते हुए स्वागत किया।

सम्मेलन स्थल में देव गहरी नेर के गुरों द्वारा देव खेल का दर्शकों ने भरपूर आनन्द उठाया। देव खेल के बाद देव गहरी के रथ की पूजा अर्चना हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम के संयोजक व पूर्व सूबेदार बलबीर सिंह की अगुवाई में किया गया। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित उत्तरीय क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख बनवीर राणा ने शिरकत क़ी।

खंड बरोट के पदाधिकारियों ने मुख्य वक्ता बनवीर राणा, विभाग प्रचारक पूर्वी दिल्ली मनोहर व विभाग कार्यवाह कुलदीप को पंरपारीक तौर से सम्मानित किया। इस विशाल सम्मेलन में 25 महिला मंडलों की महिलाओं ने सयुंक्त रूप से पहाड़ी वेशभूषा में नाटी प्रस्तुत कर अपनी पहाड़ी संस्कृति को बढावा दिया।

इससे पूर्व बरोट से ढरांगण गांव के निवासी व विभाग प्रचारक पूर्वी दिल्ली मनोहर ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पञ्च परिवर्तन के विषय पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी तथा विभाग कार्यवाह कुलदीप ने भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सौ वर्ष के कार्यकाल पर प्रकाश डालते हुए लोगों को संघ क़ी जानकारी दी।

मुख्य वक्ता बनवीर राणा ने संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में  नागपूर में डाक्टर वली राम हेडगेवार ने की थी। तब से लेकर आजतक यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक समाज व राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चौहार घाटी तथा छोटा भंगाल घाटी के संघ के पांच प्रचारक हैं। चौहार घाटी के ढरांगण गाँव से मनोहर दो वर्षो से विभाग प्रचारक दिल्ली,  छोटाभंगाल के बुनाड़ से महेश्वर विभाग शिमला, कुराण गांव के अनिल कुमार सोलन विभाग, धरमान गाँव के विवेक चंबा विभाग में प्रचारक तथा दयोट गाँव के इंद्र सिंह विस्तारक के रूप में कार्य कर रहे हैं जो कि इन दुर्गम घाटियों के लिए गर्व की बात है।

इस सम्मेलन में इन पाँचों प्रचारकों के माता पिता को मुख्य वक्ता ने सम्मानित किया गया। वहीँ सम्मेलन के अंत में नाटी प्रस्तुत करने वाली महिला मंडलों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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