सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, रायसन, कुल्लू /सुन्दर नगर/मंडी : 25 दिसंबर
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् हिमाचल प्रदेश इकाई ने अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती की पूर्व संध्या पर 24 दिसंबर को राज्य स्तरीय ऑनलाइन सायं 4:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक साहित्यिक आयोजन किया गया।
राज्य स्तरीय ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद की प्रदेशाध्यक्षा रीता सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य अतिथि बतौर पदम श्री डॉ. हरमंहिदर सिंह बेदी कुलाधिपति केंद्रीय विश्वविद्यालय, कांगड़ा (हि. प्र.) ने शिरकत की जबकि वरिष्ठ साहित्यकार अजय शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार ने विशिष्ट अतिथि बतौर पटल पर शामिल हुए।
संगोष्ठी के संचालन एवं संयोजन में सोलन इकाई के ज्ञान दास ने कुशल मंच संचालन में अपना परिचय दिया जबकि गौरव शर्मा ने सरस्वती वंदना व योगेश अत्री ने परिषद गीत में अपने मधुर आवाज देकर कार्यक्रम का आगाज किया। संगोष्ठी में पटल पर ऑनलाइन जुड़े मुख्यतिथि एवं सभी साहित्यकारों का डॉ. दीनानाथ शर्मा ने स्वागत किया जबकि अंत में डॉ. अजय कुमार शर्मा ने पटल पर उपस्थित सभी का धन्यवाद किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला मंडी इकाई ने अटल बिहारी जयंती पर आयोजित की साहित्यिक संगोष्ठी
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् हिमाचल प्रदेश जिला मंडी इकाई द्वारा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर सुंदरनगर के वृद्ध आश्रम में साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित की गई।
अखिल भारतीय परिषद् के प्रदेश सह प्रचार सचिव प्रताप अरनोट ने जानकारी देते हुए बताया कि साहित्यिक आयोजन में संस्कृत अकादमी हिमाचल प्रदेश के सचिव एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य डा. केशवानंद कौशल मुख्यातिथि शिरकत की जबकि जिला प्रचारक अजय कुमार मुख्य वक्ता के तौर उपस्थित रहे। आयोजन अध्यक्ष उत्तम चंद शर्मा ने अपनी अहम भूमिका निभाई जबकि आयोजन के संयोजक परिषद् के प्रदेश प्रचार सचिव हेमराज ठाकुर ने मुख्यतिथि एवं सभी साहित्यकारों का स्वागत किया।
उन्होंने बताया कि साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में किया गया जिसमें प्रथम सत्र में मुख्यातिथि व मुख्य वक्ता ने दिए गए “कुटुम्ब प्रबोधन” विषय पर अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके पदचिन्हों पर सभी को चलने के लिए प्रेरित किया। कुटुंब प्रबोधन विषय पर संयुक्त परिवार व्यवस्था की महत्ता के बारे में बताया जबकि उपभोक्तावादी संस्कृति से उत्पन्न सामाजिक विघटन पर चिंता व्यक्त की। काब्य गोष्ठी के दूसरे सत्र में साहित्यकारों व कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोतयों को मन्त्रमुग्ध किया।
दूसरे सत्र काब्य गोष्ठी में पी. सी. कौंडल, भीम सिंह परदेसी, सुरेन्द्र मिश्रा, मनोहर लाल, यादवेन्द्र ठाकुर, उत्तम चन्द शर्मा, शमी चौधरी, विजय कुमार तथा हेम राज ठाकुर ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर भावविभोर किया।












