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सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 25 जनवरी
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि नियुक्तियों, तकनीकी नवाचारों, सतत प्रशिक्षण, प्रभावी निरीक्षण व्यवस्था और समावेशी शिक्षा योजनाओं के माध्यम से प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इन ठोस प्रयासों से हिमाचल प्रदेश, देश के अग्रणी शिक्षा मॉडल के रूप में तेजी से उभर रहा है।
रविवार को शिक्षा मंत्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, बजौरा के शताब्दी समारोह में मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एपीएमसी के अध्यक्ष राम सिंह मियां विशिष्ट अतिथि के रूप में, जबकि पूर्व मंत्री खिमी राम शर्मा, पूर्व विधायक सोहन लाल ठाकुर तथा जिला कांग्रेस अध्यक्ष सेस राम आज़ाद विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि गुणात्मक शिक्षा और मजबूत ढांचागत विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिणाम है कि राज्य के कुल बजट का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शिक्षा क्षेत्र पर व्यय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से 130 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई पैटर्न पर स्थापित किया जा रहा है।
8 हजार शिक्षकों की नियुक्ति
रोहित ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 9931 सरकारी प्राथमिक विद्यालय, 1774 माध्यमिक विद्यालय, 962 उच्च विद्यालय तथा 1988 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों में 19,677 प्राथमिक शिक्षक, 15,333 टीजीटी और 14,983 प्रवक्ता विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में विभिन्न श्रेणियों में 8000 नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे शिक्षक कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल नियुक्तियों तक ही सीमित न रहकर छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करने के लिए युक्तिकरण प्रक्रिया को भी तेज किया है। कम नामांकन वाले स्कूलों से अतिरिक्त शिक्षकों को अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में स्थानांतरित किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक छात्र को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से शिक्षा निदेशालयों का पुनर्गठन किया गया है। इसके तहत कक्षा 12वीं तक के लिए विद्यालयी शिक्षा निदेशालय तथा उच्च शिक्षा के लिए पृथक उच्च शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई है।
अंग्रेज़ी माध्यम और प्री-प्राइमरी शिक्षा पर जोर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 से कक्षा पहली और दूसरी, जबकि 2025-26 से कक्षा तीसरी से पांचवीं तक अंग्रेज़ी माध्यम लागू किया जा रहा है। प्रारंभिक बचपन में संज्ञानात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के लगभग 6297 प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं आरंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत ईसीसीई (प्रारंभिक बचपन देखभाल एवं शिक्षा) के लिए एनटीटी को आउटसोर्स किया गया है और बच्चों की रुचि के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम एससीईआरटी सोलन के सहयोग से तैयार किया गया है।
स्मार्ट स्कूल और डिजिटल निगरानी
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल पुस्तकालयों, वर्चुअल क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाओं, फर्नीचर, स्वच्छ शौचालयों, एनसीसी, स्काउट एंड गाइड तथा छात्रावास सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। कई संस्थानों को ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ घोषित किया गया है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षकों और छात्रों की एआई आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जो प्रदेश के 14,673 स्कूलों में कार्यरत है। इससे 90 हजार से अधिक शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ऑनलाइन निगरानी हो रही है और इसका लाभ 7.73 लाख से अधिक छात्रों को मिल रहा है।
शिक्षक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव
रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों की क्षमता वृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। चालू वर्ष में 33,301 शिक्षकों को समग्र शिक्षा के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के सहयोग से ऑनलाइन मूल्यांकन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक 334 शिक्षकों और 50 मेधावी विद्यार्थियों को सिंगापुर और कंबोडिया जैसे देशों के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा जा चुका है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय शिक्षण पद्धतियों को समझकर उन्हें प्रदेश में लागू कर सकें।
समावेशी शिक्षा और स्कूल अडॉप्शन प्रोग्राम
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल स्कूल अडॉप्शन प्रोग्राम के तहत अब तक 4231 सरकारी स्कूलों को विभिन्न अधिकारियों द्वारा गोद लिया जा चुका है। ‘स्कूल पैट्रन’ शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की शिक्षा के लिए सरकार ने 245 विशेष शिक्षकों के पद सृजित किए हैं और पूर्व-प्राथमिक से 12वीं तक इन बच्चों के लिए विशेष विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।
ठाकुर ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2024 में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर 5वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि पिछली बार राज्य 21वें स्थान पर था। यह राज्य की शिक्षा नीतियों और शिक्षकों, अधिकारियों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में 2016 से 2024 तक जो प्रधानाचार्य अस्थायी रूप में पदोन्नत किया था ऐसे लगभग 2 हजार प्रधानाचार्यों को स्थाई पदोन्नति दी गयी। इसके अतिरिक्त 800 प्रधानाचार्यों को पदोन्नति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा इसके अलावा टीजीटी और जेबीटी अध्यापकों के पदों की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
बजौरा स्कूल का शताब्दी समारोह में सम्मानित किये पूर्व छात्र
शिक्षा मंत्री ने राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, बजौरा के 100 वर्ष पूर्ण होने पर छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और प्रबंधन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संस्थान अपनी शताब्दी यात्रा में अनेक उतार-चढ़ावों के बावजूद शिक्षा की ज्योति को निरंतर प्रज्वलित करता रहा है। इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त हजारों विद्यार्थियों ने देश-प्रदेश की सेवा कर संस्थान का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि विद्यालय के पूर्व छात्रों को सम्मानित कर वर्तमान विद्यार्थियों को प्रेरणा दी जा रही है। इस अवसर पर वर्ष 1926 में हीरा लाल वैद्य द्वारा विद्यालय के लिए भूमि दान किए जाने के योगदान को भी स्मरण किया गया। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी उन्हें कुल्लू ज़िला के आनी के 200 वर्ष पुराने राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अरसू में जाने का मौका मिला था।
56वें पूर्ण राजत्व दिवस पर शिक्षा मंत्री ने दी बधाई।
शिक्षा मंत्री ने हिमाचल प्रदेश के 56वें पूर्ण राजत्व दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक समरसता और विकासशील सोच के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा हिमाचल निर्माता पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने नेतृत्व में हिमाचल अस्तित्व में आया और सीमित संसाधनों के बावजूद हिमाचल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और मानव विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने स्थापना दिवस पर मिलकर प्रदेश की निरंतर प्रगति, शांति और समृद्ध भविष्य के लिए संकल्प लेने की बात कही। मंत्री ने इस अवसर पर साइंस एक्सहिबिशन का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नवाचारपूर्ण मॉडल व प्रोजेक्ट्स की सराहना की। उन्होंने छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और प्रयोगात्मक कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान और विज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विद्यालय की सभी मांगों को चरणबद्ध पूर्ण करने की घोषणा की।
समारोह के दौरान सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। शताब्दी समारोह के अवसर पर पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। एपीएमसी के अध्यक्ष ने भी इस अवसर पर उत्कृष्ट छात्रों को स्पोट्र्स किट भेंट की।
इस अवसर एपीएमसी के अध्यक्ष राम सिंह मियां और जिला कांग्रेस अध्यक्ष सेस राम आज़ाद ने भी अपने विचार रखे। इससे पहले विद्यालय की प्रधानाचार्य कविता कपूर ने मुख्यातिथि, अतिथियों, पूर्व छात्रों का स्वागत किया। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए अपनी ऐच्छिक निधि से 21 हजार रुपए देने की भी घोषणा की।
कार्यक्रम में टहल सिंह राणा, ज़िला परिषद सदस्य आशा ठाकुर, बलदेव ठाकुर, तेजा सिंह ठाकुर, धनी राम, इंटक अध्यक्ष खिमी राम चौहा, एसएमसी के प्रधान सुंदर ठाकुर, उपनिदेशक शिक्षा देश राज और सुनील दत्त, सहित विद्यालय के अध्यापक, छात्र और अभिभावक, गणमान्य लोग एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
















