महिला साहित्य संगम : सम्मान, संवेदना और साहित्य का संगम, बिलासपुर में महिला साहित्यकार संस्था का प्रेरक आयोजन

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सुरभि न्यूज़ 

रत्न चंद निर्झर, बिलासपुर

जब साहित्य संवेदना से जुड़ जाए और सम्मान समाज-निर्माण का माध्यम बन जाए, तब ऐसे आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं रहते, बल्कि प्रेरणा के अध्याय बन जाते हैं। ऐसा ही दृश्य देखने को मिला महिला साहित्यकार संस्था, हिमाचल प्रदेश की मासिक गोष्ठी के दूसरे सत्र में, जहाँ सम्मान समारोह ने पूरे वातावरण को गरिमा और मानवीय मूल्यों से भर दिया।

यह आयोजन प्रदेश उपाध्यक्षा शीला सिंह के नेतृत्व में और जिला भाषा अधिकारी बिलासपुर के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट, अनुकरणीय और संवेदनशील भूमिका निभाने वाले महानुभावों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर डॉ. पी.एस. कटवाल को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।प्रशासनिक नहीं, मानवीय उपलब्धियां

प्रदेश उपाध्यक्षा शीला सिंह ने बताया कि डॉ. कटवाल ने Development Disparity in Indian Hill States” विषय पर चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से पीएचडी की है,जिसका मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के गांवों और शहरों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को उजागर करना और लैंगिक समानता को मजबूती देना है। उनके कार्यकाल की उपलब्धियां महज़ प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय हैं।

डॉ. कटवाल ने महिला कर्मचारियों और छात्राओं के लिए डे-केयर रूम, बाहर से परीक्षा देने आने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित सुविधा, महिलाओं के लिए अलग शौचालय, छात्राओं के कॉमन रूम में पर्दों की व्यवस्था, 24 घंटे पढ़ाई के लिए ऑनलाइन और ओपन लाइब्रेरी, प्रवेशपरीक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं का ऑनलाइन समाधान व इग्नू केंद्र को नई दिशा देकर संस्थान को मानवीय बना दिया।

साहित्य से आगे, जीवन तक

महिला साहित्यकार संस्था बिलासपुर इकाई की अध्यक्षा डॉ. हेमा देवी ठाकुर ने बताया कि पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नवेंदु बंसल और उनके पति पंकज शर्मा को साहित्यिक सम्मान इसलिए दिया गया क्योंकि मथुरा और आगरा से होकर बिलासपुर आए इस दंपत्ति ने ऐसे बच्चों को गोद लिया जिनके माता-पिता नहीं थे।

दंपति ने उनकी परवरिश की और आज वे उनके माता-पिता और दादा-दादी बन चुके हैं। इस समारोह में उन बच्चों में से एक बेटी रजनी की उपस्थिति और डॉ. नवेंदु के दोनों बेटे कार्तिक और राघव का सम्मान पूरे आयोजन को भावनात्मक ऊँचाई दे गया।

मार्गदर्शन से मुकाम तक

महाविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अरुण कुमार को भी साहित्यिक सम्मान से नवाजा गया। वे वर्षों से विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें सही दिशा दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई विद्यार्थी आज देश-विदेश में पीएचडी कर रहे हैं।

इसी योगदान के लिए 15 अगस्त 2024 को जिला प्रशासन द्वारा शिक्षक सम्मान और 5 सितंबर 2025 को हिमाचल सरकार द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। जिला बिलासपुर के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग श्री सुशील पुंडीर को अधिकतम रक्तदान के लिए सम्मानित किया गया।

नई पीढ़ी की उड़ान

महाविद्यालय के होनहार विद्यार्थी कुमारी अंकिता और मनीष कुमार को हिंदी विषय में UGC–JRF और SET उत्तीर्ण करने पर सम्मानित किया गया, जो यह साबित करता है कि मेहनत और मार्गदर्शन का मेल भविष्य गढ़ता है।

कार्यक्रम में जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल, उनका स्टाफ, कल्याण कला मंच बिलासपुर, बिलासपुर लेखक संघ और अनेक सम्माननीय साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को साहित्यिक उत्सव में बदल दिया।

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