पंचायतों में भ्रष्टाचार और बजट की हेराफेरी पर सवाल, पारदर्शिता की कमी, अब जनता को जागना होगा – गुमान सिंह

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सुरभि न्यूज़

परस राम भारती, बंजार

हिमाचल प्रदेश में अब ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। यह समय केवल पद छोड़ने या नए चुनाव की तैयारी का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और मूल्यांकन का है। इस दौरान यह विचार करना आवश्यक है कि पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल में कितना सही कार्य किया और कहाँ जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए।

यह भी सच है कि कुछ प्रधानों ने ईमानदारी और निष्ठा से काम किया, जिससे उन्हें जनता की दुआएँ मिलीं। वहीं, कई स्थानों पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और स्वार्थपूर्ण कार्यों के कारण जनप्रतिनिधियों को जनता की नाराज़गी और बद्दुआओं का सामना करना पड़ा। जनप्रतिनिधियों की असली पहचान उनके काम से होती है, न कि उनके वादों से।

पंचायत स्तर पर होने वाला भ्रष्टाचार एक गंभीर चिंता का विषय है। कहा जाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें पंचायतों से शुरू होकर ब्लॉक, ज़िला, प्रदेश और अंततः केंद्र तक पहुँच जाती हैं। पंचायतों में हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट आता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उतना विकास दिखाई नहीं देता, जितना कागज़ों में दर्शाया जाता है। यह अंतर ही भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पंचायत के विकास कार्यों के लिए आने वाले धन को वार्ड स्तर पर जनता की समितियों के माध्यम से खर्च किया जाए, तो पारदर्शिता बढ़ेगी और धन का सही उपयोग संभव होगा। इससे न केवल काम की गति तेज़ होगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।

हालाँकि यह भी स्वीकार करना होगा कि हर प्रधान या उपप्रधान गलत नहीं होता। कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे भी हैं जो बिना किसी लालच के, पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसे लोग संख्या में बहुत कम हैं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में भी कमीशनखोरी और घोटालों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

हिमालय नीति अभियान के राष्ट्रीय संयोजक गुमान सिंह का इस विषय पर कहना है कि इस पूरे तंत्र में सबसे अधिक नुकसान गरीब और आम नागरिक का होता है, जिसकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि जनता अपने अधिकारों को समझे और जागरूक बने। इन्होंने आम जनता से अपील की है कि आने वाले पंचातातीराज चुनाव में वह अपने मताधिकार का सही उपयोग करे। थोड़े से लालच या निजी लाभ के लिए वोट देना न केवल पंचायत, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए घातक साबित होता है। यदि देश को सही दिशा में ले जाना है, तो ईमानदार, योग्य और देशहित में सोचने वाले लोगों को ही नेतृत्व सौंपना होगा।

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