सुरभि न्यूज़
बिलासपुर, 11 मार्च
कल्याण कला मंच बिलासपुर ने आयोजित की साहित्यिक संगोष्ठी, नीलम चंदेल ने मुख्य अतिथि की शिरकत
कल्याण कला मंच बिलासपुर हिमाचल प्रदेश की मासिक संगोष्ठी ग्राम पंचायत बैहना जट्टा के कल्लर गांव में गुरु नानक देव उद्योग में आयोजित की गई जिसमे ज़िला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर की।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस पावन अवसर पर महिला मंडल भजवाणी की अध्यक्षा मीरा देवी और उनकी पूरी टीम तथा महिला जागृति सोसाइटी कल्लर एवं कल्याण कला मंच बिलासपुर के साहित्यकारों और कलमकारों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
कार्यक्रम का आगाज सरस्वती वंदना और काले बाबा जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मंगल ध्वनि से किया गया। साहित्यकार जगदीश सहोता ने मंगल ध्वनि से पंडाल को भक्ति मय बना दिया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर इसके इतिहास के बारे में मंच के महासचिव बाबू राम धीमान ने विस्तार से प्रकाश डाला। कल्याण कला मंच बिलासपुर की अध्यक्षा तृप्ता कौर मुसाफ़िर ने मंच की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
महिला मंडल भजवाणी की अध्यक्षा मीरा देवी और उनकी टीम द्वारा मेरे पिता दे पिछवाड़े दी मेहंदी रंगलीय सुहाग मधुर गीत सुनाकर सबको झूमने पर मजबूर किया जबकि मंच के निदेशक सुरेन्द्र मिन्हास ने कहा कि ज़िला बिलासपुर में महिला मंडल भजवाणी क्रियाशील महिला मंडल है जो हमेशा कुछ न कुछ नई गतिविधियों की शुरुआत करता आ रहा है। इस महिला मंडल का सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान रहता है।
इस अवसर पर कल्याण कला मंच बिलासपुर के निदेशक सुरेन्द्र मिन्हास ने मंच के उद्देश्यों पर विस्तृत जानकारी दी। युवा कवयित्री प्रिया ने “मंदिर बांटे मस्जिद बांटी मत बांटो इन्सान को “पेश कर अपनी प्रस्तुति दी जबकि कर्मवीर कंडेरा ने “लो आ गया नलवाड़ी मेला ” ने अपनी रचना सुनाई।
जगदीश सहोता ने “दिल दियाँ गल्ला दिल बिच रही गईयां” अपनी भावनात्मक विचारों को ब्यक्त किया जबकि संयुक्त निदेशक उच्चतर शिक्षा सुशील पुंडीर ने मातृ शक्ति तुम्हें प्रणाम” मातृभूमि कों नमन किया। पूर्व प्रधानाचार्यएवं मंच के मुख्य संयोजक अमर नाथ धीमान ने”इस दुनियां से जाने वाले फिर लौट कर नहीं आते सुनाकर संसारिक जीवन की हकीकत कों बयां किया जबकि राज कुमार कौंडल ने पुरुष है मान जगत का तो नारी है संस्कार” अपनी रचना सुनाकर भारतीय संस्कारो के प्रति जागरूक लिया।
शालू ने”पारले जे रोपे इक शौक़ण उतरी, ओ कन्ता माणुआ शौक़ण होर लियाई दे पहाड़ी गीत सुनाया जबकि रवीन्द्र नाथ भट्टा ने “इक तो मैनू अपणी बर्दी प्यारी दूजा तेरा प्यार कूड़े, कीनू लावां कीनू पांवा अबका है सवाल कूड़े गीत सुनाकर भावविभोर किया।
बृज लाल लखनपाल ने तीन बहनों दो भाई का भाई, मौत आई” दिवंगत आत्मायों कों श्रद्धांजलि अर्पित की जबकि सरदार भगत सिंह ने महिला दिवस पर अपना संबोधन प्रस्तुत किया। सुमन चड्ढा ने “कहीं नहीं पढ़ाया जाएगा खुद ही समझना पड़ेगा” अपनी रचना सुनाई जबकि कैप्टन सुरेन्द्र शर्मा ने “मोबाइल की लत” से हो रहे दुशप्रभावों के प्रति सचेत किया।
रबिंद्र कमल ने “सभी को बराबर तोलता हूं बंद आंखों को खोलता हूँ” कविता सुनाई जबकि गायत्री शर्मा ने “मेरे आंसुओं का गवाह बन”मीरा ने” एक तपती दोपहर है औरत की जिन्दगी” नारी ब्यथा कों ब्यक्त किया। मनीषा भाटिया ने”समाज को सुधारने का जिम्मा नारी का” कविता सुनाई जबकि मंच की अध्यक्षा तृप्ता कौर मुसाफ़िर ने हत्था लैंदी लोटकु देबकू काच्छा पांदी धोती” पहाड़ी लोकगीत सुनाकर झूमने कों मजबूर किया।
पूर्व प्रधान औहर पंचायत रणजीत वर्धन नारी तू अभिमा, बाबू राम धीमान ने “आई गई म्यां देख अप्पू ई बिलासपुरा री नलवाड़ी, कड्ड दिल्ला रे बट्ट ” , सुरेन्द्र मिन्हास ने “डूबी नगरी व्यास हमारी, मनोरमा ने “भरिया बंदूका राजे होय तैयार “, पूजा कुमारी ने”काली घघरी ले आयां “, कोमल ने “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”, रीता सहगल ने औरतां का योगदान तथा नीलम चंदेल ने मम्मी सास प्रेरणा स्रोत” सबने अपनी अपनी प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी।
मंच का संचालन कर कल्याण कला मंच बिलासपुर के महा सचिव बाबू राम धीमान ने कुशाल परिचय दिया। इस पावन अवसर पर महिला मंडल भजवाणी, जागृति सोसाइटी कल्लर के सभी सदस्य गणों सहित इलाका के गण मान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में सभी उपस्थित गण मान्यों ने बिलासपुरी धाम का स्वाद चखा।











