सुरभि न्यूज़
राकेश शर्मा, 13 मार्च
प्रदेश भर में ग्रामीण विकास और किसान जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही सहारा संस्था के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में घाटी के अनेक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जी. बी. पंत संस्थान से आए वैज्ञानिक डॉक्टर किशोर कुमार ने किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, शहद उत्पादन तथा इसके आर्थिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन पहाड़ी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बन सकता है।
कार्यशाला के दौरान किसानों को दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटी कुंठ के बीज भी वितरित किए गए। ग्राम पंचायत श्रीकोट, पलाच्, गहीधार, कलवारी, शरची और नोहाँडा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों को बीज प्रदान किए गए, ताकि औषधीय खेती को बढ़ावा मिल सके।
प्रदेश की प्रसिद्ध संस्था सहारा लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को नई तकनीकों, स्वरोजगार और प्राकृतिक खेती से जोड़ने का कार्य कर रही है। संस्था के प्रयासों से तीर्थंन घाटी के किसानों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद और प्रशिक्षण का अवसर मिला।
इस अवसर पर सहारा संस्था के निर्देशक राजेंद्र चौहान, पूर्व प्रधान एवं सहारा बोर्ड सदस्य हरी सिंह ठाकुर, खेम ठाकुर, लोक प्रसिद्ध गायक राकेश शर्मा तथा शाईना ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सहारा संस्था के निर्देशक राजेंद्र चौहान ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और मधुमक्खी पालन को अपनाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सहारा संस्था भविष्य में भी किसानों के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के लिए नौ क्लस्टर बनाये गए जिसमे प्रतिएक क्लस्टर में दस किसानों को जोड़ा गया जो शरची, धारागाड़, गहीधार देहुरी, शहजहु, शैरेड़ा, जगाला, खाबल, रैला जिनमे चार क्लस्टर महिला किसानों के बनाए गए।
कार्यशाला में किसानों को जड़ी-बूटियों की वैज्ञानिक खेती, बाजार संभावनाओं और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी जानकारी दी गई। किसानों ने इस पहल को बेहद लाभकारी बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहारा संस्था और वैज्ञानिक संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से तीर्थंन घाटी आने वाले समय में मधुमक्खी पालन और औषधीय खेती का एक उभरता केंद्र बन सकती है।













