कुल्लू जिला के सभी शिक्षण संस्थानों में 4 अप्रैल को मनाया जाएगा आपदा जागरूकता दिवस

Listen to this article
सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 27 मार्च
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में 4 अप्रैल 1905 को विनाशकारी भूकंप आया था। इस भूकंप की तीव्रता 7.5 से 7.9 के बीच आंकी गई थी तथा यह लगभग 6 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इसे पश्चिमी हिमालय क्षेत्र का अब तक का सबसे अधिक जनहानि वाला भूकंप माना जाता है। इस आपदा में 20,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई तथा लगभग 53,000 घरेलू मवेशी भी मारे गए। करीब 1 लाख इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिनमें कांगड़ा, मैक्लोडगंज और धर्मशाला शहरों की अधिकांश इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं। इस भूकंप से उबरने की कुल लागत लगभग 2.9 मिलियन रुपये आंकी गई थी।
इस दिन को “आपदा जागरूकता दिवस” के रूप में मनाया जाता है, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। इस संदर्भ में 4 अप्रैल 2026 को जिले के सभी सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों में विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
इन गतिविधियों में ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ अभ्यास, भूकंप से पहले, दौरान एवं बाद में क्या करें और क्या न करें, विषय पर जानकारी, भाषण एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताएँ आदि शामिल होंगी।
यह कार्यक्रम संस्थानों में उनकी सुविधा अनुसार समय पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों में आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। यह दिवस आपदाओं के विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इसके अतिरिक्त, अप्रैल माह में आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं की बैठकों के एजेंडा में भी आपदा प्रबंधन को शामिल किया गया है तथा ग्राम स्तर पर सुरक्षित भवन निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *