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सुरभि न्यूज़
छविन्द्र शर्मा, आनी
आनी खंड के प्रसिद्ध देहुरी स्थित माता पच्छला मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत पुराण कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनी हुई है। कथा के आठवें दिन व्यास कथावाचक आचार्य शशांक कृष्ण कौशल ने देवी महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि माता की भक्ति ही जीवन के समस्त दुखों का निवारण करती है। उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया कि जब मनुष्य सच्चे हृदय से माता का स्मरण करता है, तो उसके जीवन के कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं और उसे आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
कथा के दौरान उन्होंने “आए ना बुए तेरे लाल. खोल बुए मंदिर के” जैसे भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु झूम उठे। इस अवसर पर आठ देवी-देवताओं का भव्य मिलन भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। पूर्णाहुति के साथ इस दिव्य कथा का समापन हो गया। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के देवी देवताओं ने अपने कारकुनों व सैंकड़ों देवलुओं संग खुंबडी रूप में शिरकत की।
देव स्थली देहुरी में स्थानीय अधिष्ठात्री देवी माँ पच्छला देवी संग सभी अतिथि देवी देवताओं का दिव्य मिलन बेहद भावपूर्ण और भक्तिमय रहा। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उनके साथ कई गणमान्य व्यक्ति भी शरीक हुए। मन्दिर कमेटी व धार्मिक आयोजन समिति ने मुख्यतिथि सहित अन्य सभी अतिथियों का भव्य स्वागत किया। मुख्यतिथि बुद्धि सिंह ठाकुर ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन से क्षेत्र में सुख शांति व समृद्धि का संचार होता है और धर्म और संस्कृति की प्रगाढ़ता भी सुदृढ़ होती है।
उन्होंने लोगों को समाज सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की भक्ति हमें संस्कार.सेवा और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुल्लू सेस राम आजाद, पूर्व एपीएमसी चेयरमैन युपेंद्र कांत मिश्रा, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी परस राम, पूर्व कांग्रेस महासचिव आनी सतपाल ठाकुर, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष कुल्लू पंकज परमार, स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक डायरेक्टर गोविंद शर्म, रेड क्रॉस सोसाइटी जिला कुल्लू के समन्वयक चंद्रकेश शर्मा तथा एडवोकेट दलीप जोशी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने माता से सुख-समृद्धि और क्षेत्र के कल्याण की कामना की। यह धार्मिक आयोजन देहुरी क्षेत्र में आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा।










