सुरभि न्यूज़
छविन्द्र शर्मा, आनी
उपमंडल के अंतर्गत दलाश क्षेत्र के ग्राम चपोहल में आज से अध्यात्म और भक्ति का भव्य महापर्व शुरू हो गया। श्री महावीर मंदिर चपोहल में 4 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाले ‘श्रीराम चरित मानस कथा ज्ञान यज्ञ’ का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रातः 11 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र की दर्जनों महिलाओं ने पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा और आभूषणों में सुसज्जित होकर भाग लिया। रौं गांव से पवित्र जल लाकर मंदिर परिसर में विधिवत स्थापना की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बन गया।
इस नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में कथा व्यास आचार्य डॉ. दया नंद गौतम अपने मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीराम कथा का रसपान करवा रहे हैं। पहले दिन की कथा में उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक देवता ही नहीं, बल्कि आदर्श मानव जीवन के प्रतीक हैं, जिनके चरित्र से समाज को सही दिशा मिलती है।
उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि वर्तमान समय में भी श्रीराम के सिद्धांत—सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य—हर व्यक्ति के जीवन को सफल और सार्थक बना सकते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर मंत्रमुग्ध दिखाई दिए।
दैनिक कार्यक्रम के अनुसार, प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से 11:00 बजे तक मंडप पूजन तथा दोपहर 1:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक कथा वाचन किया जाएगा। कथा के उपरांत प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में चपोहल, रिवाड़ी, गुहान, रौं और गोहान सहित पूरे दलाश क्षेत्र के ग्रामवासी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।
कार्यक्रम में कथा वाचन आचार्य डॉ. दया नंद गौतम द्वारा किया जा रहा है, जबकि मूल पाठ आचार्य रोशन शर्मा (सिरमौर) द्वारा किया जा रहा है। मंडप आचार्य के रूप में अशोक शर्मा अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कलश यात्रा में महिला मंडल चपोहल, रिवाड़ी और रौं की महिलाओं की विशेष भागीदारी रही, जबकि विभिन्न गांवों के श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
पूरे क्षेत्र में गूंज रही भक्ति की ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है और आने वाले दिनों में यह महायज्ञ श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।














