धार्मिक आयोजन : कुल्लू में 3 मई को आयोजित होने वाले निरंकारी संत समागम के लिए श्रद्धालुओं की उमड़ी संगत, ढालपुर मैदान बना धार्मिक आस्था का केंद्र

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सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट : कुल्लू, 28 अप्रैल

जिला मुख्यालय कुल्लू में 3 मई को आयोजित होने वाले निरंकारी संत समागम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से संतों और श्रद्धालुओं का आगमन लगातार बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे समागम की तिथि नजदीक आ रही है, पूरे क्षेत्र में भक्ति, सेवा और आध्यात्मिकता का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है।

कुल्लू का ऐतिहासिक ढालपुर मैदान इन दिनों आस्था के एक विशाल केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां दिन-प्रतिदिन संगतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ समागम में भाग लेने के लिए कुल्लू पहुंच रहे हैं। मैदान में टेंट, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।

आयोजन स्थल पर सेवादल के सदस्य पूरी जिम्मेवारी और समर्पण भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यातायात प्रबंधन से लेकर श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं तक, हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन और आयोजन समिति के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है, जिससे व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।

श्रद्धालुओं के लिए लंगर की निरंतर व्यवस्था की गई है, जहां हजारों की संख्या में लोग प्रतिदिन प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। लंगर सेवा में लगे स्वयंसेवक पूरे अनुशासन और साफ-सफाई के साथ सेवा कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, कैंटीन सुविधा भी सुव्यवस्थित ढंग से शुरू कर दी गई है, जहां जरूरत के अनुसार खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है।

समागम को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। व्यापारिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है और शहर में रौनक साफ झलक रही है। होटल, गेस्ट हाउस और अन्य ठहरने की जगहों पर भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी आवाजाही दर्ज की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि 3 मई को होने वाला यह निरंकारी संत समागम न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सेवा, भाईचारे और मानवता का संदेश देने वाला एक बड़ा आध्यात्मिक उत्सव बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में संगतों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कुल्लू पूरी तरह से भक्ति रस में सराबोर नजर आ रहा है।

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