साहित्य : कल्याण कला मंच ने आयोजित किया साहित्यिक आयोजन, कवियों के गूंजे स्वर 

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सुरभि न्यूज़

सुरेन्द्र मिन्हास, चांदपुर (बिलासपुर)

कल्याण कला मंच बिलासपुर की मासिक कला कलम संगोष्ठी गत दिन छाह तलाई (तलाई) की कर्मस्थली में संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता मंच के संरक्षक डॉ लेख राम शर्मा ने की जिसमें अभियंता विजय ठाकुर और डा राकेश कुमार ने विशेष आमंत्रित अतिथियों के रूप में शिरकत की।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन राकेश मनहास ने अपने खास अंदाज में किया जबकि घुमारवीं की हास्य कवियत्री बीना वर्धन ने रसोई नी बड़दा कोई, दपेरा तक ओढ़ी रखदे रजाई हास्य रचना सुना कर सभी को लोट पोट किया। रौडा के शिक्षाविद जीत राम सुमन ने अज्ज़ कल्ल गांवा रे लाकेयां च शहर बी लागुरे अपने पैर पसारने जबकि शामला क्षेत्र के आचार्य जगदीश सहोता ने आमले रा खादुरा स्यानेयारा रा ग्लाउरा, पीछे ते आंदा याद अपनी पहाड़ी रचना सुनाई

बछरेटू की बीना चौधरी ने रुख मैंनो पुत लगदे कई लगदे मापे, बैरी बड बड के पा देंदे स्यापे पंजाबी भाषा में अपनी रचना प्रस्तुत की जबकि डियारा के गायक शिवनाथ सहगल ने अपनी सुरीली आवाज में गीत आज से पहले आज से ज्यादा, खुशी आजतक नहीं मिली सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। अजय सौरव ने छातिया रे गब्बे इक खुह हा, लगदा मुझ इस खुआ बीच ई पई जाना कविता सुनाई जबकि दनोह के सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य अमर नाथ धीमान ने लगे कोई अपना सा आँखें चार कर लेना, जो लगे प्यारा उसे टूट कर प्यार कर लेना गजल सुना कर भाव विभोर किया।

डियारा के दिव्यांग तेज राम तेजस ने दूर देश से इक बालक आया, तलाई में आ के डेरा लाया, डियारा के श्याम सुंदर सहगल ने आ ले माई सांभ रतनों, बारां सालां रियाँ लस्सी अते रोटियां, दानोह के रविंद्र कुमार शर्मा ने बड़ दे थले बाबे ने तूणा लाया, बाबे दा तूना सबनों भाया, तथा मंच संचालक राकेश मनहास ने इक चिमटा बनाया बाबा तेरे नाम दा, ओ बी धुनें च गड़ाया बाबा तेरे नाम दा ने भजन सुना कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

रौडा से सेवानिवृत्त सहायक निदेशक सुशील पुंडीर परिंदा ने 1883 का जुग्गा सत्याग्रह पर पत्र वाचन प्रस्तुत किया जबकि दियारा से कर्मवीर कंडेरा ने आ कर गजल वफ़ा के सिले कम ही मिले, खुशी के बदले ग़म ही मिले सभी को मन्त्रमुग्ध किया।

घुमारवीं के मानव विज्ञानी डा अनेक राम संख्यान ने वन बन रहे हैं मरु मरु, सब कट रहे हैं तरु तरु कटते जंगलो पर चिंता ब्यक्त की जबकि मंच के निदेशक सुरेन्द्र मिन्हास ने कोई ता नंगे पैर मन्द्रां जादे, कोई छोटी बड्डी छिजां कुलांदे  सुना कर बिलासपुर की आदों को साँझा किया।

मंचासीन अतिथियों में डा राकेश कुमार ने जिला की संस्कृति को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास को काबिले तारीफ बताया जबकि  अभियंता विजय ठाकुर ने साहित्यिक आयोजनों को आयोजित करने के लिए मंच का साधुवाद और धन्यवाद किया तथा ट्रस्ट की तरफ से मंच को हर संभव मदद करने का भरोसा दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा लेखराम शर्मा ने कहा कि मंच द्वारा कहलूरी भाषा के लिए किये जा रहे संरक्षण, संबर्धन और प्रसारण के योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता जो कि सराहनीय प्रयास है। अंत में मंच के संयोजक अमरनाथ धीमान ने सभी आए हुए अतिथियों और सदस्यों का धन्यवाद किया।

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