कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून,

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सुरभि न्यूज़

✍️ डॉ. प्रियंका सौरभ

कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून,
झूठों के दरबार में, होता सच का खून॥

सत्ता के सब लालसी, बेच रहे ईमान,
कुर्सी की खातिर हुआ, जनता का बलिदान।
भूखे पेटों पर चढ़ा, झूठों का जुनून—
कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून॥

चोरों का सम्मान हैं, सज्जन हैं बदनाम,
अंधभक्ति की आग में, जलता सारा धाम।
न्याय तमाशा बन रहा, संसद अब कार्टून—
कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून॥

कलमों की नीलामियाँ, बिकते रोज़ विचार,
सत्ता के चरणों तले, दबता हर अधिकार।
सच लिखने वालों को, मिलता केवल खून—
कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून॥

वादों के बाजार में, बिकता हर विश्वास,
रोटी, शिक्षा, काम अब, बन बैठे उपहास।
जनता रोती रह गई, नेता लें सुकून—
कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून॥

जागो अब इंसान तुम, तोड़ो झूठा जाल,
वरना सब खा जाएंगे, भ्रष्टाचारी माल।
गरजेगा जनमत तभी, काँपेगा कानून—
कैसी ये सरकार है, कैसे हैं कानून॥

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