कल्याण कला मंच बिलासपुर की साहित्यिक गोष्ठी में कलाकारों की प्रस्तुतियों से श्रोता हुए अभिभूत

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सुरभि न्यूज़

चांदपुर, बिलासपुर

कल्याण कला मंच बिलासपुर द्वारा गत दिन बल्ह चुरानी के साथ लगते गांव गैहरा में अपनी बहुरंगी कला कलम संगोष्ठी में अदभुत और आकर्षक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता मुख्य संरक्षक डॉ लेख राम शर्मा ने की जबकि मंच पर अतिथि मंडल में जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल, पूर्व जिला परिषद सदस्य बेली राम टैगोर, स्थानीय शख्सियत धर्म पाल शर्मा और हड़िंबा वेलफेयर सोसाइटी के देश राज शर्मा विराजमान रहे। मंच का कुशल संचालन संयोजक अमरनाथ धीमान ने किया।

कार्यक्रम का आगाज डा जय महलवाल ने कविता ” वक्त पता नहीं अभी क्या क्या रंग दिखाएगा, से किया। इसके बाद अमरपुर के अध्यापक राज कुमार कौंडल ने” बीड बननेयां पर घुलाटी बढी जान्दी, निचली भट्टेड के सशक्त हस्ताक्षर अनिल शर्मा नील ने” दो रोटी के जुगाड के लिए, डियारा के टीचर राकेश मनहास ने ” रिश्तों की धूप छांव से आजाद हो गए, डियारा के व्यवसाई शिव नाथ सहगल ने” जिंदगी कैसी है पहेली हाए, गीत सुना कर मंच को भाव विभोर कर दिया।

कॉलेज बिलासपुर की हिंदी प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने ” रिश्ते अब समय नहीं मांगते, कविता सुनाई, घुमारवीं के पहाड़ी लेखन के पुरोधा लश्करी राम ने” ब्लासपुर नाहर सिंग बजिया ए दावीयां कंडे मारकण्डा रा तीरथ, कलोल के कैप्टन नीरज शर्मा ने” कन्या मित्र सन सत्तर, फरबरी मिन्हा तरीक सात थी, तरेड़ के गायक रविंदर कमल ने ” सरहद पर गरजे वीर जवान, देश के दुशमन हो सावधान,, स्थानीय स्कूल के छात्र शिवांश गौतम ने गीत ” हरि सुंदर नंद मुकंद हरि नारायण हरि ऊं सुनाया, कैप्टन सुरेन्द्र शर्मा ने”ए मानस ये समां है तेरा,, आचार्य और कथा वाचक जगदीश सहोता ने ” खोदत खोदत चूसे मर गए, मौजां लुटिया सप्पा ने, घुमारवीं के वयोवृद्ध मानव विज्ञानी डॉ अनेक राम संख्यान ने,” गीत, साथी ना कोई मंजिल,, स्थानीय स्कूल के विद्यार्थी शिवांश संख्यान ने कविता”” भारत तू है हमको प्यारा, तू है सब देशों से न्यारा,, तत्पश्चात अमरनाथ धीमान ने”” तलिया उपर पुड़ जे रखया, पुडा पर रखी लोको खारी,, सुना कर पहाड़ी बोली को समृद्धि प्रदान की। निशा देवी, राम प्यारी, कांता देवी, सीता देवी, देशराज, सत्या देवी व रमा कुमारी, ने भी अपनी अपनी नवीन रचनाये प्रस्तुत की।

समापन सत्र में भराड़ी के ब्रिज लाल लखनपाल ने,”” बहुत जाप जपते जपते आज हम पहुंच गए हैं कहां,, स्थानीय वरिष्ठ सदस्य सरस्वती शर्मा उर्फ स्वाति ने कविता,”” बदल रहा है आदमी, बदल रहा है जमाना,, मंच के कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर सहगल ने, गीत,” चल मेरी जिंदे नवीं दुनियां बसानी,, सुना कर वाह वाही लूटी। मंच के निदेशक सुरेन्द्र मिन्हास कहलूरी ने अपनी पहाड़ी रचना यूं बयां की “” ऐसेलुडियां मारदे थे घाटां बाटा, नईं हुदी थी तड़ीस हुआ नी कदी खरलाटा।

अंत में अतिथि मंडल से धर्म पाल शर्मा ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज को सही दिशा मिलती है। वहीं बेली राम टैगोर ने स्वयं की मंच से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। नीलम चंदेल ने मंच के कार्यों की प्रशंसा करते हुए अनुरोध किया कि मंच अनछुए साहित्यिक विषयों को भी छुए। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ लेखराम शर्मा ने प्रस्तुत कलाओं की समीक्षा की और अपनी नवीन रचना यूं बयां की “” फ़ोने इनी घड़ी रेडूवे खबार सब छुड़ाई ते, रोटी खाने रे वी सारे स्वाद मजे गंवाई ते।

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