सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
चौहार घाटी की बरोट पंचायत स्थित दुर्गा माता मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर घाटी के अधिकांश लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के नाम का व्रत रखा तथा मंदिर परिसर में रात्रि के समय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भजन-कीर्तन का सिलसिला 5 सितंबर को भी दिनभर जारी रहा।
दुर्गा माता मंदिर कमेटी बरोट के सचिव बुद्धि सिंह ने बताया कि 5 सितंबर को मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस वर्ष भंडारे का आयोजन बरोट पंचायत के लक्कड़ बाजार बरोट निवासी तथा मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय दिनेश कुमार शास्त्री के पुत्र प्रभव शर्मा उर्फ भानू की ओर से किया गया।
भंडारे में चौहार घाटी और छोटाभंगाल घाटी के लोगों के अलावा बरोट पहुंचे सैकड़ों पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। लोगों ने भंडारे का आनंद लेने के साथ दुर्गा माता मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
डेहनसर झील समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान
बरोट, 5 सितंबर। भादो माह की 20 प्रविष्टे के पवित्र स्नान के अवसर पर छोटाभंगाल और चौहार घाटी के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार लगभग 18 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र डेहनसर झील के अलावा लंबाडग-ऊहल नदी संगम स्थल बरोट, चल्यार, पुरानी हेचरी और सूरजपुर गढ़ सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
स्थानीय लोगों के साथ जिला कुल्लू की लगघाटी, मंडी के पद्धर, जोगिन्द्रनगर, बैजनाथ तथा अन्य दूरदराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए पहुंचे। डेहनसर झील तक पहुंचने के लिए कई श्रद्धालुओं ने तीन-चार दिन पहले ही यात्रा शुरू कर दी थी। दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने रास्ते में विभिन्न स्थानों पर रात्रि विश्राम करने के बाद 4 सितंबर की रात और 5 सितंबर को झील के समीप पहुंचकर पवित्र स्नान किया।
इस बार मौसम साफ रहने के कारण श्रद्धालुओं ने सुरक्षित तरीके से यात्रा पूरी की और शाम तक अधिकांश श्रद्धालु सकुशल अपने घरों को लौट गए। पोलिंग गांव से डेहनसर झील तक के रास्ते में चार-पांच स्थानों पर समाजसेवियों की ओर से चाय-पानी और भोजन के भंडारे भी लगाए गए।
जोगिन्द्रनगर के सुरेन्द्र कुमार और भगवान दास पहली बार डेहनसर झील में पवित्र स्नान करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि झील काफी ऊंचाई पर स्थित है, लेकिन यहां के प्राकृतिक और मनमोहक दृश्य देखकर वे बेहद प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगली बार वे अपने अन्य दोस्तों को भी साथ लेकर यहां आएंगे।
दोनों युवकों ने बताया कि वापसी के दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें क्षेत्र में पाई जाने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ शिव बूटी, घुगी और वाण जैसी जड़ी-बूटियां भी अपने साथ ले लीं। स्थानीय लोगों के अनुसार इन जड़ी-बूटियों को घर में रखने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि डेहनसर झील ही नहीं, बल्कि पूरी छोटाभंगाल घाटी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और बेहद रमणीक है।












