सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू, 21 अक्तूबर
ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में बुधवार को सप्ताह भर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया। भगवान रघुनाथ जी की पारंपरिक रथयात्रा के साथ उत्सव का आगाज हुआ, जिसमें कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से आए सेंकड़ों देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित रहीं।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने प्रदेशवासियों को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम कुल्लू दशहरा को देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाता है।
उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा एवं मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विजयादशमी के संदेश का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, कर्तव्य, त्याग, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार तथा समाज में वैमनस्य पैदा करने वाली शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए, क्योंकि एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है।
विकसित भारत-2047 के संकल्प में योगदान देने की अपील
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
विकसित भारत-2047 का विजन आर्थिक रूप से समृद्ध, तकनीकी रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समरस और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा भारत बनाने की परिकल्पना करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पर्वत, वन, नदियां और जैव विविधता प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं। हिमाचल की देव परंपराएं भी प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं। ऐसे में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, नए कौशल अर्जित करने, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अपनाने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यह आयोजन पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के अवसर भी प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि उत्सव से होने वाले आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचने चाहिए। इसके साथ ही उत्सव की पारंपरिक पहचान और प्रामाणिकता को भी संरक्षित रखना जरूरी है।
राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव आस्था, सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करेगा। उन्होंने भगवान रघुनाथ जी से हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
उत्सव के शुभारंभ के बाद राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित उत्पादों एवं सामग्री की सराहना की। इससे पूर्व कुल्लू पहुंचने पर राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया।
इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, पूर्व सांसद एवं हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़, लोकेन्द्र कुमार, सुरेंद्र शौरी, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।












