अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में देव आस्था, वैश्विक संस्कृति और लोक परंपराओं का होगा संगम – सुंदर सिंह ठाकुर

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सुरभि न्यूज़ 
प्रताप अरनोट, कुल्लू, 20 अक्तूबर 
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 इस वर्ष देव आस्था, समृद्ध धार्मिक परंपराओं, हिमाचली लोक संस्कृति और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता के अनूठे संगम के रूप में आयोजित किया जाएगा। 21 से 27 अक्तूबर तक ढालपुर मैदान में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक उत्सव में 347 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। उत्सव के दौरान देव परंपराओं की गरिमा, देवी-देवताओं की सुविधा एवं सुरक्षा तथा धार्मिक मर्यादाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसी उद्देश्य से 21 से 27 अक्तूबर तक ढालपुर मैदान में रेहड़ी-फहड़ियां लगाने की अनुमति नहीं होगी।
यह जानकारी कुल्लू के विधायक एवं अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने मंगलवार को बहुउद्देश्यीय भवन कुल्लू में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी। इस अवसर पर उपायुक्त एवं उत्सव समिति के उपाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार शर्मा तथा पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. भी उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि उत्सव का शुभारंभ 21 अक्तूबर को राज्यपाल के हाथों होगा। इस दौरान वह भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा में शामिल होंगे। वहीं, 26 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
देव संस्कृति की गरिमा और परंपराओं को प्राथमिकता
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि देवभूमि हिमाचल की धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। कुल्लू दशहरा की विशिष्टता यहां की देव परंपराओं, देवी-देवताओं की सामूहिक भागीदारी और उनसे जुड़े सदियों पुराने रीति-रिवाजों में निहित है। यही विशेषताएं इस उत्सव को देश-विदेश के अन्य आयोजनों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि उत्सव के आयोजन में देव संस्कृति के पारंपरिक स्वरूप और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। देवी-देवताओं के आगमन, ठहराव और धार्मिक गतिविधियों के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। देव समाज की भावनाओं का सम्मान करना और परंपराओं के अनुरूप उत्सव का आयोजन करना समिति की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के साथ आने वाले देवलुओं, कारकूनों और श्रद्धालुओं की सुविधा, आवागमन, ठहराव तथा सुरक्षा के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। उत्सव के दौरान देव परंपराओं की गरिमा बनाए रखने और धार्मिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संपन्न करवाने में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
ढालपुर में रेहड़ी-फहड़ियों पर प्रतिबंध
उत्सव समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 21 से 27 अक्तूबर तक ढालपुर मैदान में रेहड़ी-फहड़ियां लगाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का मूल स्वरूप देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और देव संस्कृति से जुड़ा है। इसलिए आयोजन स्थल पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे धार्मिक गतिविधियों में बाधा न आए और उत्सव की पारंपरिक गरिमा बनी रहे।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करने तथा उत्सव के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन में सहयोग देने की अपील की।
वैश्विक, भारतीय और हिमाचली संस्कृति का संगम
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में वैश्विक, भारतीय, हिमाचली और कुल्लू की समृद्ध लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को आकर्षक बनाने के लिए विशेष कोरियोग्राफी तैयार की जा रही है। देश-विदेश के कलाकार कुल्लू की पारंपरिक धुनों पर आधारित विशेष प्रस्तुतियां देंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न देशों की नृत्य शैलियों का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि उत्सव के माध्यम से स्थानीय लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ विभिन्न देशों की कला और परंपराओं से परिचित होने का अवसर भी मिलेगा। कुल्लू की पारंपरिक धुनों पर विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को और अधिक विशिष्ट बनाएंगी।
ग्लोबल डांस में 10 देशों की भागीदारी
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘ग्लोबल डांस’ कार्यक्रम रहेगा। इसमें इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी।
22 अक्तूबर : इस दिन इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका और रूस के सांस्कृतिक दल प्रस्तुतियां देंगे। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश की एलएसी-हिमाचल टुकड़ी और लद्दाख के प्रतिभागी भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।
24 अक्तूबर : इस दिन इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के सांस्कृतिक दल अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में हिमाचल प्रदेश की एलएसी टुकड़ी, लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल की कथकली और मणिपुर के कलाकार भाग लेंगे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के दो विद्यार्थी दलों के प्रतिभागी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
26 अक्तूबर : इस दिन भी उपरोक्त नौ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के साथ आईसीसीआर के विद्यार्थी दल प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय सांस्कृतिक दलों में हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल की कथकली और मणिपुर के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
ग्लोबल डांस के माध्यम से दर्शकों को विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक नृत्य शैलियों और लोक कलाओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की वैश्विक पहचान को मजबूत करने के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगा।
कुल्लू कार्निवाल में महिला मंडलों की भागीदारी
उत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाले कुल्लू कार्निवाल में स्थानीय महिला मंडल भी भाग लेंगे। महिला मंडल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की सांस्कृतिक प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और महिलाओं की सहभागिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
विधायक ने कहा कि उत्सव में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ ग्रामीण खेलों तथा राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा और उत्सव में खेल, संस्कृति तथा सामाजिक सहभागिता के विभिन्न आयाम शामिल होंगे।
सातों दिन सजेगी सुरों की महफिल
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्याओं में हिमाचली लोक संगीत, पंजाबी गीत-संगीत, सूफी गायन, बैंड प्रस्तुतियों और लोकप्रिय कलाकारों की प्रस्तुतियों का आकर्षण रहेगा। लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में प्रतिदिन आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं में देश-प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकार दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
सांस्कृतिक संध्याओं का कार्यक्रम 
21 अक्तूबर: ममता जोशी, राजीव राजा, युग्म हिमालय रूट और अभिज्ञा बैंड प्रस्तुतियां देंगे।
22 अक्तूबर: प्रसिद्ध गायक सलमान अली के साथ दिव्या श्रीवास्तव, आयुष, पंकज डोगरा और बीरबल किन्नौरा अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
23 अक्तूबर: पंजाबी गायक काका मुख्य आकर्षण होंगे। इनके अतिरिक्त कुमार साहिल, अजय चौहान और हिमाचली लोक गायक सुनील राणा प्रस्तुतियां देंगे।
24 अक्तूबर: प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक कुलदीप शर्मा, तत्त्वा बैंड और पुलिस बैंड ‘फीट ऑफ फायर’ सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाएंगे।
25 अक्तूबर: पंजाबी गायक रोहनप्रीत सिंह के साथ रमेश ठाकुर, अनुज शर्मा और लमन बैंड प्रस्तुतियां देंगे।
26 अक्तूबर: प्रसिद्ध सूफी गायक सतिंदर सरताज मुख्य आकर्षण होंगे। इनके अतिरिक्त इंदरजीत और फिरदौस बैंड अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
27 अक्तूबर: अंतिम सांस्कृतिक संध्या में ठाकुर दास राठी, कुशल वर्मा और खुशबू सहित अन्य लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
पहली बार होंगे ड्रोन और लेजर शो
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में पहली बार ड्रोन शो और लेजर शो का आयोजन किया जाएगा। ये कार्यक्रम 22, 24 और 26 अक्तूबर को रथ मैदान में आयोजित होंगे। आकाश में रोशनी और आकर्षक दृश्य संयोजन के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने वाले ये कार्यक्रम उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगे।
देव संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय से आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी एक नया अनुभव प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, आवागमन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुचारू बनाए रखना प्रशासन, उत्सव समिति तथा सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से उत्सव में भाग लेने, देव परंपराओं का सम्मान करने और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने की अपील की।

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