परियोजना निदेशक कुल्लू ने किया कुल्लू में सिंचाई योजनाओं का निरीक्षण

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सुरभि न्यूज़ 
कुल्लू, 23 अक्टूबर 
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II), जायका के परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने शुक्रवार को खंड परियोजना प्रबंधन इकाई, कुल्लू के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फलटनालह स्थित बहाव सिंचाई योजना तथा शिरार गांव में निर्माणाधीन बहाव सिंचाई योजना शिरार-सौनी पुल से रौंडा सेरी का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मचारियों से योजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों और किसानों को मिलने वाले लाभों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सुनील चौहान ने सर्वप्रथम फलटनालह स्थित बहाव सिंचाई योजना का निरीक्षण किया तथा योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों के साथ संवाद किया। उन्होंने किसानों से सिंचाई सुविधा की उपलब्धता और योजना के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।
इस दौरान क्षेत्र में स्थित पारंपरिक घराटों (जलचालित आटा चक्कियों) को पुनः संचालित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। परियोजना निदेशक ने उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए इन घराटों को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं का आकलन करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के साथ-साथ क्षेत्र की पारंपरिक विरासत के संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने पी.एम.सी. के अधिकारियों को क्षेत्र में स्थित पारंपरिक घराटों के पुनः संचालन की संभावनाओं का आकलन करते हुए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और स्थानीय लोगों की आजीविका के नए साधन विकसित हो सकें।
डॉ. सुनील चौहान ने फलटनालह में ट्राउट मछली पालन के लिए प्रस्तावित स्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थल की उपयुक्तता तथा क्षेत्र में ट्राउट पालन की संभावनाओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर कृषि के साथ-साथ आजीविका के वैकल्पिक साधनों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
इसके उपरांत परियोजना निदेशक ने शिरार गांव में निर्माणाधीन बहाव सिंचाई योजना शिरार-सौनी पुल से रौंडा सेरी का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मचारियों के साथ योजना के नक्शों और निर्माण संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया तथा कार्य की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने योजना के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करते हुए निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंचाई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सुविधा मिलेगी तथा कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य परियोजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा करना, लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित करना तथा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने की संभावनाओं का आकलन करना रहा।
निरीक्षण के दौरान राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई, हमीरपुर से विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. आशीष आनंद एवं डॉ. अनु यादव तथा वरिष्ठ विपणन अधिकारी नीतिका उपस्थित रहीं। जिला परियोजना प्रबंधन इकाई, मंडी से जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेम राज वर्मा एवं विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. खूब राम ठाकुर मौजूद रहे।
खंड परियोजना प्रबंधन इकाई, कुल्लू से खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. जयंत रत्ना, निर्माण अभियंता भरत भूषण, कृषि प्रसार अधिकारी मोनिका सैनी एवं पर्यवेक्षक साहिल भारद्वाज उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जिला परियोजना प्रबंधन इकाई, मंडी से निर्माण अभियंता सौरभ तथा पी.एम.सी., हमीरपुर से सुदर्शन, नरदेव एवं तृषान पुरोहित भी निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे।

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