बिलासपुर में कल्याण कला मंच की मासिक कला कलम सँगोष्ठी आयोजित

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सुरभि न्यूज़ ब्युरो

बिलासपुर, 7 फरवरी

कल्याण कला मंच की मासिक कला कलाम संगोष्ठी साकेत इको सभागार में सम्पन्न हुई जिसमें बिलासपुर के विभिन्न क्षेत्रों से पच्चीस से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कहानीकार सुषमा खजूरिया ने की जबकि अतिथि साहित्यकार पवन चौहान और सुन्दर सिंह भी विशेष तौर पर मन्डी से आं कर शामिल हुए। कार्यक्रम में मंच का संचालन अध्यापिका विजय कुमारी सहगल ने बहुत सुन्दर अंदाज में किया। सर्वप्रथम पंडोखर की पूनम शर्मा ने सर्दी आह आई सर्दी बदल गई हम सब की वर्दी सुनाकर सर्दियों का हवाला दिया। तत्पश्चात बिलासपुर कालेज के डा. जय महलवाल ने वसन्त का स्वागत यूँ किया खेतों में पीली पीठी सरसों लहरा रही, लगता उससे स्वर्णिम आभा है आ रही है। फिर बीना वर्धन ने बाल कविता मेरे बच्चे चिन्न भिन्नू, कदी दौडे इन्नू कदी अन्नू सुनाकर मंत्र मुग्रा किया। पूर्व प्रधानाचार्य जीत राम सुमन ने पहाडिया पहाडा रेया, पहाडी तू ग्लाई ले, करी के रुखाली तू पहाडा जो सजाई ले पर्यावरण असन्तुलन पर चिन्ता जताई। कथा वाचक आचार्य जगदीश सहोता ने ठण्ड का यूं मंथन किया थर थर दांत बजाने वाली, शरद ऋतु है आई कविता सुनाई। तत्पश्चात शिक्षा संयुक्त निदेशक के पद से सेवा निवृत्त सुशील पुण्डीर परिन्दा ने हर रोज मैंने इन्हें देखा चूना लगाते हुए, सभी चूना लगाते है पता नहीं चलता अपनी रचना सुनाई।

शिक्षाविद अमरानाथ धीमान ने घर बड़‌दिया री मेरी तिल्ली जे गवाँछी, सारी सखिया लई मैं पुछी पहाड़ी कविता सुनाई जबकि रेखा चन्देल (झण्डता) ने  “तुम कितनी सुन्दर हो कोटाधार, तथा प्रबन्धक चन्द्रभेखर पंत ने आसमां से दिखती है जमी खूबसूरत सुना कर तालिया समेटी। विजय कुमारी सहगल ने उठो, लोगेो हुई है भोर, पक्षियों ने कलरव मचामा चहुं ओरर जबकि मन्डी के सुन्दर सिंह ने काले काले बादल आये सुनाई। सुन्दरनगर के अन्तरिक्ष ने दिन दिन करके हफ्ता गुजरा, गुजरा महीना साल गितसुन कर भाव भिवोर किया जबकि भगत सिंह ने  नौकरी का सफर पहले आसान पर अब जबकिअमरनाथ ने कभी राजमाह, कभी चने, हर रोज रोटी मैं बनाता हूं आपबीती सुनाई। तृप्ता कौर मुस्तफिर ने आई बे मुसाफरा, सफर जिंदगानी दा नभावी वे मुसाफरा कविता सुनाई जबकि मास्टर आर्विन ने  चकमक, चकमक ने आग जलाई सुना कर मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच प्रधान सुरेन्द्र मिन्हास ने भारी दुश्मन को भी सहयोग से हराती, हाथी की भी ये है धूल चटाती, सुनाकर चींटी का गुणगान किया। सुन्दरनगर से पवन  चौहान ने अपनी रचना से आसमान में तारे निकले सुनकर सभी को गुदगुदाया। अन्त में संगोष्ठी की अध्यक्षा सुषमा खजुरिया ने सभी प्रचनाओं की प्रशंसा की और संगोष्ठी के यादगार बताते हुए सबके राम निहारे प्रभु अविराम, राम जन्मभूमि है सबका स्वभिमान रचना से सुनाकर संगोष्ठि का समापन किया।

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