प्रदेश में जल विद्युत परियोजना लगने के भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

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सुरभि न्यूज़

ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट

छोटाभंगाल घाटी के मुल्थान बाज़ार में सदियों से गुजर बसर रहे लोगों में अब तक कई लोग प्राकृतिक आपदा को झेलते ही आए हैं। मुल्थान बाजार के हीरा गेस्ट हाउस के संचालक व पूर्व बीडीसी सदस्य हीरा लाल ने बताया कि मई माह मुल्थान बाज़ार के लोगों के लिए अशुभ रहा है। इस वर्ष दस मई को 25मेगावाट की केयू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लंबाडग की हेड रेस टलन से पानी का रिसाव होने से मुल्थान बाज़ार को बर्वादी के कगार पर लाकर खडा कर दिया है वहीँ रिहायशी मकानों, दुकानों, होटलों तथा गेस्ट हाउसों में मलवा तथा बड़े- बड़े पत्थर आ गए हैं। साथ ही मुल्थान गाँव के किसानो की लगभग 50 कनाल उपजाऊ जमीन भी बर्वाद हो गई है। गौरतलव है कि 13 मई 2015 को भारी बारिश होने से मुल्थान के समीप सैरी नाला में भारी बाढ़ आने से पंचायत घर मुल्थान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और जिसका बहाव पूरे  मुल्थान बाजार में फैल जाने से आए मलवे तथा पत्थर मुल्थान बाज़ार की दुकानों व रिहायशी मकानों में भर गए थे। वहीँ इस वर्ष भी दस मई की तरह 13 मई को मुल्थान बाज़ार में इसी तरह चीखों व पुकारों से यहाँ का पूरा महौल खौफमय हो गया। ऐसी हालत में मुल्थान बाज़ार में गुजर बसर करने वाले लोगों को करोड़ों का आर्थिक नुक्सान झेलना पड़ रहा है। मुल्थान बाज़ार व गाँव के लोग मई माह में घटी घटना को देखते हुए मई माह को अशुभ मान रहे हैं। यही नहीं चार सितमबर 1995 तथा 15 सितम्बर 2012 में उहल नदी में आई प्रलयकारी भीषण बाढ़ ने भी दोनों क्षेत्र लोगों को काफी नुक्सान पहुंचा कर गहरे जख्म दिए थे जो कि आज तक भुलाए नहीं जा सकते हैं। उस समय बरोट बाज़ार तथा लक्कड़ बाज़ार में भी भारी तवाही मची थी, उस दृश्य को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं।

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