साहित्य : साहित्यकार डॉ० रामसेवक ‘विकल’ की 23वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक आयोजन में अर्पित किये श्रद्धांसुमन

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सुरभि न्यूज़

बलिया, उत्तरप्रदेश

उत्तरप्रदेश के बलिया जन पद के इसारी सलेमपुर ग्राम में प्रख्यात साहित्यकार डॉ० रामसेवक ‘विकल’ की 23वीं पुण्यतिथि प्रतिवर्ष की भांति मनाई गई। जिसमें बलिया जनपद के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती की पूजा, एवं डॉ० विकल के चित्र पर श्रद्धांजलि पुष्पों को अर्पित करने से हुई। डॉ० विकल द्वारा रचित सरस्वती वंदना का पाठ किया गया। डॉ० रामसेवक ‘विकल’ हिंदी, भोजपुरी, बांग्ला, संस्कृत, ओड़िया एवं अंग्रेजी भाषाओं के विद्वान रहे।

उनका जन्म बलिया जनपद के ही ईसारी सलेमपुर ग्राम में हुआ। डॉ० विकल ने रांची विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की। वो झारखंड के सिंहभूम में गिरी भारती स्कूल में प्राध्यापक रहे। डॉ० रामसेवक ‘विकल’ प्रख्यात साहित्यकार थे, जिन्होंने शताधिक रचनाएं कीं। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का भोजपुरी में पद्यानुवाद किया। गीतांजलि का अनुवाद, श्री जगन्नाथ माहात्म्य, मनपाखी, पुराण पुरुष, डूबे हुए भाई बहन, कमलाकांत जैसी रचनाएं डॉ० विकल ने किया। डॉ० विकल जी का स्वर्गवास 11 नवंबर 2002 में हुआ।

डॉ० विकल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर यह चर्चा उनकी स्मृति में चलने वाले डॉ० रामसेवक ‘विकल’ पुस्तकालय पर आयोजित हुए “पुण्य स्मरण कार्यक्रम” में की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ० विकल के ज्येष्ठ पुत्र एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० आदित्य कुमार ‘अंशु’ जी ने किया।

इस अवसर पर आए हुए पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि, “डॉ० विकल का व्यक्तित्व आकाश सा ऊंचा है, हम सब को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।” अशोक यादव ने डॉ० विकल जी के कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि,”उनकी रचनाएं मानव समाज का दर्पण हैं। डॉ० विकल की रचनाएं अपने विषय को गंभीरता से छूती हैं।”

राजेश यादव जी ने कहा कि,” भले ही आज डॉ० विकल भौतिक रूप में हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनके द्वारा किए गए प्रेरणास्पद कार्य एवं स्वयं उनका प्रेरणास्पद जीवन हमारे पथप्रदर्शक बनेंगे।” दैनिक जयदेश के ब्यूरो चीफ सेराज आलम ने डॉ० विकल के बाद उनकी पांडुलिपियों को सहेजने एवं उनकी स्मृति में चलने वाले डॉ० रामसेवक ‘विकल’ साहित्य कला संगम सेवा ट्रस्ट के प्रबंधक डॉ० आदित्य कुमार ‘अंशु’ के कार्यों की प्रशंसा की।

खुर्शीद आलम ने डॉ० विकल की रचनाओं को बदलते समाज में भी प्रासंगिक बताया। वहीं आशुतोष तिवारी ने डॉ० विकल के जीवन को युवाओं के लिए प्रेरक बताया। सतीश गुप्ता ने कहा कि डॉ० विकल जी द्वारा छोड़ी गई रचनाओं की विरासत पूरे समाज के लिए उत्तरदायित्व है। इस अवसर पर आए महानुभावों ने विकल की कुछ रचनाओं का पाठ किया।

अंत में डॉ० आदित्य कुमार ‘अंशु’ ने सबका आभार व्यक्त करते हुए डॉ० विकल से जुड़े हुए अनसुने किस्सों को साझा किया और यह भी बताया कि हाल ही में डॉ० रामसेवक ‘विकल’ द्वारा रचित भोजपुरी लोकगीतों का संकलन ‘आखर’ का प्रकाशन हुआ है, जिसका संपादन डॉ० विकल के पौत्र आनंद कुमार ने किया है। इस अवसर पर संतोष गुप्ता, सद्दाम हुसैन, नीलम शर्मा, रंजना शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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