सम्मान : हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ से साहित्यकार प्रोफेसर रणजोध सिंह भारत श्रीलंका गौरव सम्मान से श्रीलंका में अलंकृत

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सुरभि न्यूज़

लंका/नालागढ़, 13 जनवरी

पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के 20वें अंतरराष्ट्रीय लेखक सम्मलेन में जो श्रीलंका की राजधानी कोलोंबो में आयोजित किया तथा जिस में भारत तथा श्रीलंका के 100 से भी ज्यादा लेखकों ने भाग लिया। पांच। दिवसीय लेखन शिविर का आरम्भ 9 जनवरी, 2025 को हुआ और जिसका समापन 13 जनवरी, 2025 को होगा।

इस अवसर पर साहित्यिक योगदान के लिए सोलन के डॉ प्रेम लाल गौतम, डॉ शंकर वशिष्ठ, डॉ अशोक गौतम, ऊना से शांति कुमार स्याल, रमा स्याल, बद्दी से डॉ प्रताप मोहन भारतीय तथा नालागढ़ से प्रो. रणजोध सिंह को ‘भारत श्रीलंका हिंदी गौरव’ सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर डॉ अशोक गौतम की हास्य व्यंग्य की दो पुसकों का विमोचन भी किया गया।

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर रणजोध सिंह नालागढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। उनकी अब तक तीन पुस्तकें आईना (काव्य संग्रह), कैंथ का पेड़ (कहानी संग्रह) तथा मैली कमीज (लघु कथा संग्रह) के अलावा 14 साझा संग्रह छप चुके हैं तथा नालागढ़ साहित्य कला मंच के लघुकथा संग्रह ‘ कथा स्पन्दन’ का सम्पादन भी कर चुके हैं।

उनकी कविताएं, कहानियाँ, लघुकथाएं, व्यंग्य लेख तथा संस्मरण देश के विभिन्न समाचार पत्रों तथा साहित्यिक पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं। टी.वी. तथा अनेक साहित्यिक पटलों पर भी प्रोफेसर सिंह की कविताओं और कहानियों का प्रसारण होता रहता है। उनकी कहानियों का नाट्य रूपांतरण पुरस्कृत भी हुआ है। उनकी कहानियों और लघुकथाएं, अपनी संवेदनशीलता और सरसता के कारण भारतीय भाषाओं में अनूवादित भी हुई है। साहित्य से संबंधित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान उनकी झोली में हैं।

उनके साहित्यकर्म का सबसे ज्यादा लाभ स्कूली विद्यार्थियों को हुआ है, क्योंकि वे स्थानीय स्कूलों में जाकर बच्चों में नैतिक शिक्षाओं (मोरल वैल्यूज़) का प्रचार-प्रसार कहानियों, लघुकथाओं तथा कविताओं की वर्कशॉप लगा कर करते हैं, जिसे बच्चें सहज ही ग्रहण कर लेते हैं।

नालागढ़ साहित्य कला मंच के अध्यक्ष यादव किशोर गौतम, सचिव हरिराम धीमान तथा अन्य सदस्यों ने प्रो.रणजोध सिंह को पुरूस्कार मिलने पर प्रसन्नता जाहिर की है तथा इसे मंच के लिए गर्व का विषय बताया है। वरिष्ठ नागरिक संघ तथा पेंशनरस एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश घई तथा अन्य सदस्यों ने भी उन्हें बधाईयाँ देते हुए उनके आगामी लेखन कार्य के लिए मंगल कामना की।

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