महिलायों को 543 सीटों में ही रिजर्वेशन का प्रावधान होना चाहिए, सीटें बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं : इंदु पटियाल

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सुरभि न्यूज़

कुल्लू, 21 अप्रैल

भाजपा सरकार द्वारा लाया गया महिला आरक्षण बिल तो महिलाओं के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है। देश की 543 सीटों में ही महिलाओं के लिए रिजर्वेशन का प्रावधान होना चाहिए था, सीटें बढ़ाने का क्या औचित्य नहीं। क्या ये संविधान के विरुद्ध निर्णय नहीं था। जरा सोचिए देश पहले ही भ्रष्टाचार के कारण कर्ज में डूबा हुआ है और ऐसे में देश पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता। यह बात कांग्रेस नेत्री पूर्व उपाध्यक्ष जिला परिषद कुल्लू इंदु पटियाल ने पत्रकारों से साझा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक पर 2023 में हस्ताक्षर किए हैं तो इसे लागू करने में मोदी सरकार ने बिलंब क्योंकर किया। विरोध विधेयक का नहीं इसकी आड़ में परिसीमन का है जो विकट आर्थिक विषमताओं से जूझ रहे देश के हित में नहीं है।

उन्होंने कहा की ये तो सुना था और देखा भी है कि विभिन्न दल एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपनी विचारधारा को बेहतर साबित करने हेतु अनेक कूटनीतिक चालें खेलते हैं जिसे उनकी भाषा में राजनीति कहा जाता है। स्वतंत्रता के बाद देश और प्रदेशों की राजनीतिक सत्ता पर सदैव पुरुषों का वर्चस्व कायम रहा है। दुनिया की आधी आबादी महिलाओं के साथ समाज और सत्ता ने ही नहीं बल्कि परिवार ने भी भेदभाव किया है। उसके निस्वार्थ योगदान का कभी कोई मूल्यांकन नहीं किया गया।

इंदु पटियाल ने कहा कि देश में सामाजिक, न्यायिक और धार्मिक संस्थाएं संचालित की जा रही हैं उनमें महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है या न के बराबर है। कारण यह भी रहा है कि घर गृहस्थी को संभालते संभालते उन्हें बाहरी क्षेत्र में खुद को साबित करने का वक्त ही नहीं मिलता। आज की पढ़ी लिखी आधुनिक नारी हर क्षेत्र में उपलब्धियां अर्जित कर रही हैं तो उन्हें राजनीति में समान अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है। क्या इस देश के नव निर्माण में नारी शक्ति की कोई भूमिका नहीं ? आजादी से लेकर आजतक स्व इंदिरा गांधी की दूरगामी सोच से बने महिला मंडल जो अब स्वयं सहायता समूह के रूप में कार्य कर रहे हैं और अपने गांवों की सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण कर रहे हैं।

कृषि, बागबानी, घरेलू उत्पादों, बुनकर कला के प्रति समर्पित होकर देश, विदेश में नाम कमा रहे हैं। ऐसा करते हुए नारी दोहरी भूमिका अदा कर रही है। एक ओर परिवार और दूसरी ओर समाज को सभ्य बनाने का बीड़ा यदि महिलाएं उठा रही हैं तो उन्हें राजनीतिक सत्ता में मात्र 33 प्रतिशत आरक्षण देने में आनाकानी नहीं करनी चाहिए।

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