नशे की अंधेरी दुनिया से सच की रोशनी तक, नशे के खिलाफ कैमरा बना हथियार, छात्रों ने उजागर की नशे की कड़वी सच्चाई

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सुरभि न्यूज़

परस राम भारती, बंजार

सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) कांगड़ा के छात्रों ने नशे की समस्या पर एक संवेदनशील और प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। यह कार्य “मिशन संभव-वार अगेंस्ट ड्रग्स” अभियान के सहयोग से किया गया, जिसे हिमालयन वालंटियर्स टूरिज्म (एचवीटी) फाउंडेशन संचालित कर रहा है।

निफ्ट के छात्र-छात्राओं आइशा, आरुषि, भाव्या और नमन की टीम ने कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर नशे की जमीनी सच्चाई को समझने का प्रयास किया। उन्होंने उन स्थानों तक पहुंचकर वास्तविक हालात देखे, जहां नशेड़ी एकत्र होकर नशा करते हैं। इन परिस्थितियों ने छात्रों को गहराई से प्रभावित किया और समस्या की गंभीरता को करीब से समझने का अवसर दिया।

छात्रों द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री में नशे की लत, उसके दुष्प्रभाव, उपचार प्रक्रिया और पुनर्वास के बाद समाज में दोबारा मुख्यधारा से जुड़ने की चुनौतियों को प्रमुखता से दर्शाया गया है।रिहैबिलिटेशन केंद्रों में छात्रों ने विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों से मुलाकात की जिनमें से कुछ ऐसे युवा जो कभी पढ़ाई में अव्वल रहे और प्रतियोगी परीक्षाएँ पास कर चुके थे, वहीं कुछ ऐसे भी थे जो नशा तस्करी से जुड़े माहौल में पले-बढ़े है। इन अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ कि नशा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है।

सजा नहीं, सहारा जरूरी है, मुख्य संदेश

डॉक्यूमेंट्री से एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया कि नशे की समस्या का समाधान केवल सख्त कानून या सजा नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज का सहयोग, समझ और स्वीकार्यता आवश्यक है। इस पहल को सामाजिक कार्यकर्ता पंकी सूद की जीवन यात्रा से प्रेरणा मिली है, जिन्होंने लगभग 20 वर्ष पहले नशे से मुक्ति पाकर “मिशन संभव” की शुरुआत की थी।

मिशन संभव, वार अगेंस्ट ड्रग के संस्थापक, समाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यटन कारोबारी पंकी सूद का कहना है कि नशे से जूझ रहे लोगों को समाज से अलग नहीं करना चाहिए। यदि परिवार, स्कूल और समाज साथ आएं, तो उन्हें दोबारा सामान्य जीवन में लाया जा सकता है। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

विशेषज्ञों की राय और मार्गदर्शन

नशा विशेषज्ञ डॉ. वैद्य ने बताया कि नशे से उबरने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि मानसिक समर्थन और सामाजिक सहयोग भी बेहद जरूरी होता है। इस परियोजना का मार्गदर्शन निफ्ट कांगड़ा के एक पूर्व बीबीसी डॉक्यूमेंट्री निर्माता एवं प्राध्यापक द्वारा किया गया, जिन्होंने छात्रों को सामाजिक विषयों पर जिम्मेदार और संवेदनशील प्रस्तुति देने के लिए प्रेरित किया।

अभियान का विस्तार और सहयोग

“मिशन संभव” अभियान को अब और व्यापक रूप देने की योजना है। इसके तहत अगस्त माह में लद्दाख, कश्मीर और कारगिल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा सके।

इस अभियान को ट्राइडेंट ऑटोमोबाइल्स, बेंगलुरु के संस्थापक समीर चौधरी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सी.एस.आर.) के तहत आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हुआ है, जिससे कार्यक्रमों को और मजबूती मिली है।

यह पहल स्पष्ट करती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
संवेदनशीलता, सहयोग और जागरूकता के माध्यम से ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है।

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