सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के किए जा रहे दावे दुर्गम छोटाभंगाल और चौहार घाटी में धरातल पर बेमानी साबित हो रहे हैं। घाटी के कई सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ताओं और अध्यापकों समेत विभिन्न पद लंबे समय से रिक्त पड़े होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है।
स्थानीय स्कूल प्रबंधन समितियों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए कई बार स्थानीय विधायक तथा शिक्षा विभाग को लिखित प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से भी समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न स्कूलों में खाली पदों को भरने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुल्थान की स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष कमलेश कुमारी तथा मुल्थान पंचायत की पूर्व प्रधान दुर्गेश कुमारी ने बताया कि छोटाभंगाल घाटी में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय मुल्थान में भी प्राचार्य सहित प्रोफेसरों के कई पद खाली हैं। वहीं, घाटी के विभिन्न स्कूलों में भी प्रधानाचार्य, प्रवक्ताओं और अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुल्थान में पिछले वर्ष से ही प्रवक्ताओं के कई पद खाली थे। इसके चलते स्कूल का शैक्षणिक कार्यभार लंबे समय तक मात्र एक राजनीतिक शास्त्र (पॉलिटिकल साइंस) प्रवक्ता के सहारे चलता रहा। हालांकि गत माह प्रधानाचार्य का पद भर दिया गया था, लेकिन इस वर्ष राजनीतिक शास्त्र के प्रवक्ता का भी तबादला होने के बाद अब विद्यालय का कार्यभार मुख्य रूप से प्रधानाचार्य के कंधों पर आ गया है।
स्कूल प्रबंधन समिति के अनुसार विद्यालय में राजनीतिक शास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, कंप्यूटर प्रवक्ता, शास्त्री, शारीरिक अध्यापक तथा हिंदी के पद रिक्त पड़े हुए हैं। विद्यालय में वर्तमान में करीब 120 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता अभिभावकों को सताने लगी है।
कमलेश कुमारी और दुर्गेश कुमारी ने प्रदेश सरकार तथा शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुल्थान स्कूल में रिक्त पड़े सभी पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया तो स्थानीय लोगों को सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
इस संबंध में विधायक किशोरी लाल ने कहा कि छोटाभंगाल और चौहार घाटी के लोगों की यह गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के स्कूलों में रिक्त पदों को भरने का मामला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष जोरदार तरीके से उठाया जाएगा और समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गम क्षेत्रों में पहले ही शिक्षा के सीमित संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में शिक्षकों के पद लंबे समय तक खाली रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अब क्षेत्रवासियों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।










