सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, बिलासपुर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घट नृत्य को पहचान दिलाने वाली कलाकार और शिक्षिका के निधन से साहित्यकारों व कलाकारों में गहरा शोक
हिम कल्याण लोक कला मंच की पूर्व प्रधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध घट नृत्यांगना और समर्पित शिक्षिका फुलां चंदेल के निधन से हिमाचल प्रदेश के साहित्य और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को प्रदेश की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
फुलां चंदेल ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा लोक कला, संस्कृति और शिक्षा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित किया। विशेष रूप से घट नृत्य को मंचीय पहचान दिलाने और इसे व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनकी कला में हिमाचल की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।
उनके निधन का समाचार मिलते ही साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की भावना व्याप्त हो गई। हिम कल्याण लोक कला मंच से जुड़े सुरेन्द्र मिन्हास, अमर नाथ धीमान, जीत राम सुमन, शिव नाथ सहगल, हुसैन अली सहित दर्जनों साहित्यकारों और कलाकारों ने फुलां चंदेल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि फुलां चंदेल का असामयिक निधन प्रदेश के कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने न केवल लोक नृत्य को अपनी कला-साधना के माध्यम से आगे बढ़ाया, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया। उनकी सरलता, कला के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी सोच उन्हें अपने समकालीन कलाकारों से अलग पहचान देती थी।
फुलां चंदेल का व्यक्तित्व केवल एक कलाकार तक सीमित नहीं था। वह एक शिक्षिका के रूप में भी समाज और विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रहीं। शिक्षा और लोक संस्कृति के बीच समन्वय स्थापित करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों और परंपराओं को जीवित रखना आवश्यक है।
घट नृत्य जैसी लोक विधा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उनके लिए लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृति और पहचान थी। यही कारण है कि उनके निधन से उनके परिवार और परिचितों के साथ-साथ प्रदेश के व्यापक कला समुदाय ने भी एक संवेदनशील कलाकार और संस्कृति की सच्ची साधिका को खो दिया है।
साहित्यकारों और कलाकारों ने कहा कि फुलां चंदेल की कला-साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए जिस निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया, वह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है।
हिम कल्याण लोक कला मंच और प्रदेश के साहित्य एवं कला जगत से जुड़े लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कलाकारों ने कहा कि फुलां चंदेल भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, उनकी शिक्षाएं और लोक संस्कृति के प्रति उनका समर्पण लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहेगा।












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