सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू, 17 अक्तूबर
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा केंद्रों में लाइव निगरानी तथा ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड नकल पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में नकल के 268 मामले सामने आए थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 64 रह गई है।
डॉ. राजेश शर्मा शनिवार को कुल्लू के साई स्टार स्कूल, ढालपुर तथा पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भुंतर के दौरे के दौरान विद्यार्थियों और अध्यापकों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों, परीक्षा प्रणाली में सुधार, विद्यार्थियों की प्रतिभा के विकास और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और परीक्षाओं में नकल के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। नकल के मामलों में कमी लाने में जनसहयोग और आम लोगों से प्राप्त सूचनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों में निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। नकल की संभावनाओं को कम करने के लिए प्रश्नपत्रों में प्रश्नों के क्रम और प्रश्न संख्या में बदलाव जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं। इससे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने और मेहनती विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को धरातल पर लागू करने के लिए बोर्ड स्तर पर विभिन्न पहल की जा रही हैं। परीक्षा प्रणाली को विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमता, तार्किक योग्यता, विश्लेषणात्मक कौशल और व्यावहारिक ज्ञान के आकलन के अनुरूप बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्रों में अवधारणात्मक समझ और उच्च स्तरीय सोच पर आधारित प्रश्नों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटकर परीक्षा पास करने के बजाय विषयों को गहराई से समझने और प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।
विद्यार्थियों और अध्यापकों को नए परीक्षा पैटर्न से परिचित करवाने के लिए बोर्ड की वेबसाइट पर मॉडल प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाए गए हैं। साथ ही पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के अनुरूप रखने, अध्यापकों के प्रशिक्षण और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए विद्यार्थियों, अध्यापकों, अभिभावकों और आम नागरिकों की सहभागिता आवश्यक है। विद्यार्थियों को जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना शिक्षा का मूल उद्देश्य है। अध्यापक उचित मार्गदर्शन देकर, अभिभावक सहयोग प्रदान करके और आम नागरिक अपने अनुभवों व सुझावों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इन चारों स्तंभों के बीच समन्वय और सहयोग से ही विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। विभिन्न शिक्षण संस्थानों का दौरा करने का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, समस्याओं को समझना और संबंधित पक्षों से सीधे सुझाव प्राप्त करना है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि इस पहल के तहत वह भरमौर, किन्नौर, कांगड़ा और धर्मशाला का दौरा कर चुके हैं। इसी क्रम में कुल्लू के शिक्षण संस्थानों में संवाद किया गया है। भविष्य में प्रदेश के अन्य स्कूलों का दौरा कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
डॉ. राजेश शर्मा ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पुस्तकें खरीदते समय बोर्ड द्वारा निर्धारित पुस्तकों को प्राथमिकता दें और अधिकृत स्रोतों से ही खरीदारी करें। पुस्तकें खरीदने के बाद बिल लेना भी सुनिश्चित करें, ताकि उनकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि अच्छी अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों की विषय संबंधी समझ मजबूत करने और शैक्षणिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बोर्ड का प्रयास है कि शिक्षण सामग्री और परीक्षा प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, अच्छे संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। इसी दिशा में पाठ्यक्रम में हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से संबंधित अध्याय शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं की जानकारी विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ती है और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है। युवाओं में नशे के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि उन्हें नशे से दूर रखने और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करने में शिक्षा की अहम भूमिका है। इसी उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने ‘शिक्षा युक्त हिमाचल, चिट्टा मुक्त हिमाचल’ की टैगलाइन अपनाई है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नैतिक मूल्यों का विकास युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में सहायक हो सकता है। विद्यार्थियों को अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। दौरे के दौरान डॉ. राजेश शर्मा ने विद्यार्थियों और अध्यापकों के साथ संवादात्मक सत्र में भाग लिया। विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, विषयों की बुनियादी अवधारणाओं को समझने और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करने के लिए अध्यापकों से निरंतर संवाद बनाए रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि बोर्ड का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। इसके लिए परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त सुझावों के आधार पर सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें।










