सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 26 अक्टूबर
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के अवसर पर कुल्लू दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित नाट्य प्रस्तुतियों के दूसरे दिन अटल सदन कुल्लू में दो शानदार नाटकों का मंचन किया गया। पहली प्रस्तुति हरिशंकर परसाई के चर्चित व्यंग्य ‘एक गोभक्त से भेंट’ पर आधारित रही, जबकि दूसरी प्रस्तुति एंटन चेखोव के हास्य नाटक ‘द प्रपोजल’ की रही। दोनों नाटकों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी दिया। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुतियों की खूब सराहना की।
एक गोभक्त से भेंट’ ने खोली पाखंड की पोल
नाट्य प्रस्तुतियों के दूसरे दिन की पहली प्रस्तुति रेनबो आर्ट एंड थिएटर क्लब के कलाकारों ने जीवानंद चौहान के निर्देशन में दी। हरिशंकर परसाई द्वारा रचित व्यंग्य ‘एक गोभक्त से भेंट’ पर आधारित इस नाटक में धर्म, राजनीति और गौ-रक्षा के नाम पर फैलाए जाने वाले पाखंड तथा दोहरे चरित्र को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
रेलवे स्टेशन पर लेखक की एक तथाकथित स्वामी जी से मुलाकात के माध्यम से परसाई ने यह दिखाया है कि किस तरह आस्था और जीव-दया के नाम पर स्वार्थ तथा राजनीति को साधा जाता है। व्यंग्य समाज की अतार्किक सोच, अंधविश्वास और दिखावटी धार्मिकता पर करारा प्रहार करता है।
कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से नाटक के संदेश को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाया। इस प्रस्तुति में जतिन कुमार, अक्षिता, हितिया, अभिनव, दीपांकुर, साइना, रानिका, इशिता और महिंदर सिंह सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया।
द प्रपोजल’ ने हास्य के रंगों से बांधा समां
दूसरी प्रस्तुति मन्नत कला मंच के कलाकारों ने एंटन चेखोव के प्रसिद्ध हास्य नाटक ‘द प्रपोजल’ की दी। नवनीत भारद्वाज के निर्देशन में मंचित इस नाटक ने दर्शकों को खूब हंसाया।
नाटक की कहानी एक ऐसे पिता और उसकी 28 वर्षीय बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी नहीं हुई है। पिता अपनी बेटी का विवाह करवाना चाहता है, जबकि बेटी भी किसी तरह शादी करना चाहती है। हालांकि, उनके अड़ियल और बेढंगे व्यवहार के कारण विवाह की बात आगे नहीं बढ़ पाती।
इसी बीच परिवार का एक परिचित युवक विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचता है। लेकिन शादी की बात करने के बजाय बातचीत दूसरी दिशा में मुड़ जाती है। देखते ही देखते मामूली बातों पर बहस शुरू हो जाती है और मामला दोनों पक्षों के अहंकार तक पहुंच जाता है। कोई भी झुकने को तैयार नहीं होता, जिससे हास्य की कई स्थितियां पैदा होती हैं। अंततः तमाम नोकझोंक के बाद विवाह का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है।
नाटक में नवनीत, हेमा, हरीश, अशोक, गोपाल, विनय, चंपा और अलीशा सहित अन्य कलाकारों ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। नाटक का संगीत मान चंद ने दिया, जबकि प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी हितेश भार्गव ने संभाली।
दोनों नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को अलग-अलग रंगों का अनुभव कराया। जहां ‘एक गोभक्त से भेंट’ ने सामाजिक विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठाए, वहीं ‘द प्रपोजल’ ने हास्य और मनोरंजन के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।











