सुरभि न्यूज़
काजा, लाहौल स्पीति
एक सप्ताह तक सुलगता रहा कूड़ा, युवा कांग्रेस ने प्रशासन से उठाई स्थायी समाधान की मांग; एसडीएम बोले- आग बुझा दी गई है, अब कुल्लू भेजा जा रहा कचरा
स्पीति घाटी के मुख्यालय काजा स्थित डंपिंग यार्ड में कूड़े में लगी आग ने क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से डंपिंग यार्ड में कूड़ा जलने और उससे लगातार उठने वाले धुएं के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्पीति घाटी जैसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में कूड़े का इस तरह जलना चिंता का विषय बन गया है।
कूड़े से उठने वाले धुएं से आसपास का वातावरण प्रभावित होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। विशेषकर दमा, खांसी और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए ऐसा धुआं अधिक परेशानी पैदा कर सकता है। इसके अलावा क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण और वन्यजीवों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले को लेकर काजा युवा कांग्रेस अध्यक्ष केसंग रापचिक ने प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डंपिंग यार्ड में कूड़ा जलने की घटना गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। स्पीति जैसे नाजुक पर्यावरण वाले क्षेत्र में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
केसंग रापचिक ने कहा कि डंपिंग यार्ड में लगी आग को पूरी तरह बुझाने के साथ ही कूड़ा निपटान की स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। उन्होंने कहा, “स्पीति का पर्यावरण किसी की लापरवाही की कीमत नहीं चुका सकता। अगर आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।”
वहीं, उपमंडलाधिकारी (नागरिक) काजा दीक्षित राणा ने बताया कि डंपिंग यार्ड में आग लगी थी, जिसे अग्निशमन विभाग की सहायता से बुझा दिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले कूड़े के निपटान का कार्य एक स्थानीय व्यक्ति को सौंपा गया था। संबंधित व्यक्ति ने कूड़े को गड्ढा बनाकर उसमें दबा दिया था।
एसडीएम ने कहा कि अब कूड़ा निपटान का कार्य एक एनजीओ को सौंपा गया है और कचरे को निपटान के लिए कुल्लू भेजा जा रहा है। प्रशासन की ओर से व्यवस्था में बदलाव किया गया है, ताकि कूड़े का उचित तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
बहरहाल, इस घटना ने काजा की कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित निगरानी और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करे।









