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ऊना : अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई ऊना हिमाचल प्रदेश द्वारा नव संवत्सर के उपलक्ष में किया गया कार्यक्रम रामनवमी के शुभ अवसर पर दो सत्रों में संपन्न हुआ। माननीय प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रीता सिंह जी के दिशा निर्देशन में इस कार्यक्रम का प्रथम सत्र बच्चों द्वारा मंत्र उच्चारण से प्रारंभ हुआ तत्पश्चात कविता पाठ,भजन गायन और समूह गान किया गया। द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि माननीय प्रधान श्रीमती अनीता जसवाल जी द्वारा कुटुंब प्रबोधन पर शानदार वक्तव्य रखा गया। उन्होंने मातृशक्ति और विशेष रूप से बच्चों को प्रेम पूर्वक इससे जुड़ने का आग्रह किया। सभी ने उन्हें तन्मयता से सुना और सराहा। तदोपरांत खड़े होकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। उत्साह और श्रद्धा के साथ हर्षोल्लास में कार्यक्रम संपन्न हुआ, प्रसाद स्वरूप मिठाई वितरित की गई और श्रीमती सपना जसवाल जी ने सभी का धन्यवाद किया।
डॉoइंदु बाला
प्रदेश सचिव अoभाoसाoपo हिमाचल प्रदेश

 

घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं के पेलियो म्यूजियम में भारतीय नव संवत्सर के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद बिलासपुर इकाई की विशेष बैठक और कवि गोष्ठी हुई।

यह बैठक प्रांत अध्यक्ष डॉ. रीता सिंह के दिशा निर्देशानुसार आयोजित की गई। अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अनेक राम संख्यान ने की। इसमें बृजलाल लखनपाल ने मुख्यातिथि और सुषमा खजुरिया ने विशिष्ट अतिथि के शिरकत की। सर्वप्रथम अखिल भारतीय साहित्य परिषद के द्वारा निश्चित किए गए कुटुंब प्रबंधन विषय पर केशव शर्मा, सुषमा खजुरिया, कैप्टन सुरेंद्र शर्मा, शीला सिंह, बृजलाल लखनपाल, डॉ. अनेक राम संख्यान सहित विभिन्न वक्ताओं ने विस्तार पूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि

कुटुंब केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

यह वह आधारशिला है, जिस पर समाज, संस्कार और सभ्यता का भव्य भवन खड़ा होता है। भारतीय परंपरा में परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला कहा गया है। यही वह स्थान है, जहां मनुष्य अपने जीवन के मूल्यों, प्रेम, त्याग, सहयोग, अनुशासन और सम्मान को सीखता है।

जब परिवार सुदृढ़ होता है, तब समाज सशक्त बनता है और राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है। कवि गोष्ठी में शमशेर सिंह चंदेल, सुनील शर्मा, वीणा वर्धन, कैप्टन सुरेंद्र शर्मा, शीला सिंह, केशव शर्मा, बृजलाल लखनपाल, सुषमा खजुरिया, डॉ. अनेक राम संख्यान आदि ने रचनाएं सुनाकर खूब वाही लूटी।

कार्यक्रम में मंच संचालन जिला सचिव शीला सिंह ने किया।

चंबा

रामनवमी एवं नव संवत्सर के पावन, मंगलमय एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जिला चंबा इकाई द्वारा सलूनी उपमंडल के अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं रमणीय पर्यटन स्थल सारोला नाग मंदिर में एक भव्य जिला स्तरीय कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम न होकर भारतीय संस्कृति, परंपरा और नव चेतना का एक जीवंत उत्सव बनकर उभरा।

प्रकृति की सुरम्य गोद में बसे इस पावन स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कोने-कोने से आए 16 प्रख्यात कवियों एवं दो प्रतिभाशाली बाल कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और संवेदनशील कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह कवि गोष्ठी वास्तव में साहित्य के उस दीप की तरह थी, जिसने दूर-दराज़ क्षेत्रों में भी ज्ञान, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना की रोशनी फैलाई।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य भारतीय नव वर्ष के वैज्ञानिक आधार, सांस्कृतिक महत्व एवं पारंपरिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना था। इस अवसर पर समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. कविता बिजलवान ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में सामाजिक समरसता कुटुंब प्रबोधन एवं सनातन संस्कृति के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह के हृदय में सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता का भाव जागृत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार श्री सुभाष साहिल द्वारा की गई, जिनकी साहित्यिक उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और भी ऊँचाई प्रदान की। मंच संचालन का कार्य श्री किरण कुमार वशिष्ठ ने अत्यंत कुशलता, सहजता और प्रभावशाली शैली में किया, जिससे कार्यक्रम का प्रवाह निरंतर आकर्षक बना रहा।

इस आयोजन को गढ़ माता साहित्य मंच, सलूनी के सहयोग से संयुक्त तत्वावधान में संपन्न किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों को व्यापक स्वरूप देने में सफलता मिली। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रमुख कवियों में हिंगराज ‘चिराग’, रोशन लाल, महाराज सिंह परदेसी, श्याम अजनबी, बालम सिंह, किशोर कालिया, सुभाष चंद कसाव, करे सिंह राजोरिया, फिरोज कुमार रोज तथा सोनी चिरही जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे, जिन्होंने हिंदी एवं पहाड़ी भाषा में अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

विशेष रूप से बाल कवि अभिनव सूर्य एवं वीरांशी टंडन की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि साहित्य की ज्योति नई पीढ़ी में भी समान रूप से प्रज्वलित है।

कार्यक्रम दोपहर 12:00 बजे प्रारंभ होकर लगभग 3:00 बजे तक निरंतर उत्साह और ऊर्जा के साथ संचालित हुआ। इस दौरान लगभग 200 से अधिक मातृ शक्ति की गरिमामयी उपस्थिति तथा 500 से अधिक श्रोताओं की सहभागिता ने इस आयोजन को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर दिया। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह प्रमाणित किया कि साहित्य आज भी समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

कवियों की ओजपूर्ण एवं संवेदनशील प्रस्तुतियों ने स्थानीय जनमानस को साहित्य से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास किया। यह आयोजन “साहित्य चला गाँव की ओर” की भावना को मूर्त रूप देते हुए अपने उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

समारोह के समापन पर सभी प्रतिभागी कवियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर

साथ ही, उपस्थित वृद्ध माताओं को बैज लगाकर सम्मानित करना इस कार्यक्रम की संवेदनशीलता और संस्कारशीलता का प्रतीक रहा।

अंत में मंदिर प्रांगण में आयोजित भंडारे में सभी ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और सामूहिक चित्र के साथ इस सफल आयोजन का समापन हुआ।

यह संपूर्ण कार्यक्रम परम आदरणीय प्रांत अध्यक्ष डॉ. रीता सिंह जी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संभव हो सका। उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं प्रांतीय पदाधिकारियों के निरंतर प्रोत्साहन ने जिला इकाई को इस चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थिति में भी सफल आयोजन करने की ऊर्जा प्रदान की।

जिला चंबा की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों एवं आपसी दूरियों (50 से 100 किलोमीटर तक) के बावजूद परिषद के सभी सदस्यों ने जिस समर्पण, एकजुटता और साहित्यिक निष्ठा का परिचय दिया, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।

हम सभी परिषद सदस्य यह संकल्प लेते हैं कि भविष्य में भी इसी प्रकार साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर प्रयासरत रहेंगे और यदि किसी प्रकार की त्रुटि रह जाए तो आदरणीय परिषद से मार्गदर्शन प्राप्त कर स्वयं को और अधिक सशक्त बनाएँगे।

 

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