सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, मण्डी : 5 जून
उप निदेशक (गुणवत्ता शिक्षा), समग्र शिक्षा के निर्देशानुसार जिला मण्डी के 497 राजकीय विद्यालयों में सम्पन्न सोशल ऑडिट की जिला स्तरीय सार्वजनिक जनसुनवाई 10 जून 2026 को संस्कृति सदन, कंगनीधार, मण्डी में आयोजित की जाएगी।
यह जानकारी देते हुए जिला सोशल ऑडिट समन्वयक, मण्डी, चारु वैद्या ने बताया कि जनसुनवाई में जिला मण्डी के सभी 25 शिक्षा खण्डों से सोशल ऑडिट में शामिल विद्यालयों के प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्य, पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के प्रतिनिधि, सोशल ऑडिट फेसीलिटेशन टीम के सदस्य, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं अन्य हितधारक भाग लेंगे।
उन्होंने बताया कि यह सोशल ऑडिट एक स्वतंत्र तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा करवाया गया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज के साथ एक विशेष समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया था, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम द्वारा जिले के चिन्हित विद्यालयों का सोशल ऑडिट अक्तूबर 2025 को किया गया है।

क्या है सोशल ऑडिट और इसके मुख्य उद्देश्य
समय शिक्षा के तहत स्कूलों का सोशल ऑडिट केवल वित्तीय या कागजी निरीक्षण नहीं है, बल्कि यह समुदाय की सहभागिता से संचालित एक पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के प्रदर्शन, आधारभूत संरचना, छात्र कल्याण योजनाओं तथा समावेशी शिक्षा की स्थिति का मूल्यांकन करना है।
मुख्य उद्देश्यः
छात्र अधिकारों का आकलनः यह सुनिश्चित करना कि विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तके, बर्दी, छात्रवृत्ति एवं अन्य लाभ समय पर प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
आधारभूत संरचना की समीक्षाः स्वीकृत बजट के अंतर्गत निर्मित कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल, विद्युत एवं अन्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन।
छात्र सुरक्षा पर विशेष ध्यानः विद्यालयों में बालिकाओं एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए शारीरिक, मनो-सामाजिक एवं साइबर सुरक्षा उपायों की समीक्षा।
समावेशी शिक्षा को बढ़ावाः सभी वर्गों के बच्चों के नामांकन, उपस्थिति एवं रिटेंशन दर का मूल्यांकन, ताकि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण एवं समान शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह सोशल ऑडिट विद्यालयों के UDISE + रिपोर्ट कार्ड, विद्यालय सर्वेक्षण तथा समुदाय से प्राप्त फीडबैक पर आधारित है। जनसुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC), विद्यालय प्रमुखों, अभिभावकों, पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के प्रतिनिधियों तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।
इस ‘फैक्ट-फाइंडिंग संवाद’ का उद्देश्य कमियों की पहचान करना, व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जबाबदेही को सुदृढ़ करना तथा छात्र हित में आवश्यक सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करना है।
उप निदेशक (गुणवत्ता शिक्षा) ने सभी संबंधित विद्यालय प्रमुखों, SMC एवं PRI सदस्यों तथा SAFT सदस्यों से जनसुनवाई में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।










