सुरभि न्यूज़
बरोट (खुशी राम ठाकुर)
हिमाचल प्रदेश का उभरता हुआ प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बरोट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अपनी बेमिसाल आलू की फसल के लिए भी अलग पहचान रखता है। बरोट का आलू न केवल हिमाचल प्रदेश में, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी अपनी खास गुणवत्ता और स्वाद के लिए बहुत पसंद किया जाता है। इन दिनों बरोट घाटी में मुख्य नकदी फसल आलू की खुदाई का काम जोरों पर चल रहा है और किसान अपने-अपने खेतों से फसल निकालकर मंडियों में बेच रहे हैं।
क्षेत्र की बरोट, लपास और बरधाण सहित विभिन्न पंचायतों के किसान शुरुआती सीजन में ही आलू को निकालकर बेचने में लगे हुए हैं। हालांकि, इस बार बाजार से मिल रहे दामों ने किसानों के चेहरे पर थोड़ी मायूसी ला दी है। इस शुरुआती सीजन में बरोट का बेहतरीन आलू 12.50 रुपये (साढ़े बारह रुपये) प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है।
बंपर पैदावार, पर पिछले साल से कम मिले दाम
क्षेत्रीय किसानों—दिले राम, प्रेम सिंह, बुधी सिंह और रामलाल—का कहना है कि इस बार बरोट घाटी में आलू की बंपर पैदावार (भारी उत्पादन) हुई है। फसल की गुणवत्ता भी हमेशा की तरह शानदार है, लेकिन शुरुआती सीजन में किसानों को इस नकदी फसल के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष शुरुआती सीजन के दौरान बरोट का आलू 15 रुपये से लेकर 25 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिका था। उसकी तुलना में इस बार का 12.50 रुपये का शुरुआती भाव काफी कम है, जिससे लागत निकालना भी चुनौतीपूर्ण लग रहा है।
अगली फसल की तैयारी: खेतों में बीजा जा रहा धनिया
कम दामों की चिंता के बीच किसान समय बर्बाद किए बिना अपनी अगली फसल की तैयारियों में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि वे खेतों से आलू निकालते ही उसमें धनिया बीजने का काम शुरू कर रहे हैं, ताकि अगली नकदी फसल से इस घाटे की भरपाई की जा सके।











