सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, नालागढ़
भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला तथा कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा प्रतिवर्ष देश के चुनंदा साहित्यकारों की प्रकाशित पुस्तकों पर चर्चा तथा समीक्षा करने हेतु एक भव्य कार्यक्रम करवाया जाता है जिसका नाम है मीमांसा।
साहित्य में रूचि रखने वाले स्कूली तथा कॉलेज के बच्चों के लिए साहित्य की बारीकियों समझने के लिए यह एक सुनहरा अवसर होता है साथ में वरिष्ठ तथा युवा लेखक भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। एक तरह इसे साहित्यिक महाकुम्भ कहा जा सकता है।
वर्ष 2025 में प्रकाशित और ट्रस्ट द्वारा चयनित पुस्तकों पर मीमांसा-4 कार्यक्रम 19 से 21 अगस्त के मध्य शिमला के ऐतिहासिक गयेटी थिएटर में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रो. रणजोध सिंह की बहुचर्चित पुस्तक मैली कमीज़ (लघुकथा संग्रह) को भी शामिल किया गया है, जिसका लोकापर्ण तथा समीक्षा दिनांक 21 अगस्त को गयेटी थिएटर शिमला में होगी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारत की सुप्रसिद्ध साहित्यकार शोभा थरूर श्रीनिवासन होंगी। ‘मैली कमीज़’ की समीक्षा एवं चर्चा डॉ. आशु खोसला (मॉडरेटर) के अलावा तीन स्कूली छात्र सुजल शर्मा, आशना, तथा शगुन रनोट का पैनल करेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रो. रणजोध सिंह हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। वे अब तक तीन पुस्तकें ‘आईना’ (काव्य संग्रह), ‘कैंथ का पेड़’ (कहानी संग्रह) तथा ‘मैली कमीज़’ (लघुकथा संग्रह) के अलावा 15 सांझा संग्रह लिख चुके हैं।
उनकी कविताएं, कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य लेख तथा संस्मरण देश के विभिन्न समाचार पत्रों तथा साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। टीवी तथा अनेक साहित्यिक पटलों पर भी प्रोफेसर सिंह की कविताओं और कहानियों का नियमित प्रसारण होता रहता है।
उनकी कई कहानियों का नाट्य रूपांतरण भी हो चुका है, जिनमें से कुछ को पुरस्कार भी मिले हैं। उनकी लिखने की संवेदनशीलता, सहजता और सरसता के कारण उनकी रचनाएं कई भारतीय भाषाओं में अनुदित भी हुई हैं। साहित्य के क्षेत्र में उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक सामान प्राप्त हो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि उनके साहित्य से सबसे ज्यादा लाभ कॉलेज तथा स्कूली बच्चों को हो रहा है। वह स्थानीय शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों में नैतिक शिक्षाओं (मोरल वैल्यूज) का प्रचार-प्रसार कर कहानियोँ, लघुकथाओं तथा कविताओं की वर्कशॉप लगाकर करते हैं, जिससे बच्चे सहज ही ग्रहण कर लेते हैं।
नालागढ़ साहित्य कला मंच के अध्यक्ष हरि नाम धीमान तथा नालागढ़ पेंशनर्स और सीनियर सिटीजन के अध्यक्ष नरेश घई तथा क्षेत्र के अन्य लेखकों ने इसे नालागढ़ के लिए गर्व का विषय बताया है।













