हिमाचल प्रदेश की वार्षिक कॉलेज रैंकिंग में राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय बंजार का प्रदेश में 13वां तथा जिला कुल्लू में रहा प्रथम स्थान

Listen to this article

सुरभि न्यूज़

बंजार (कुल्लू), 24 सितंबर

।शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी की गई

हिमाचल प्रदेश के 142 महाविद्यालयों की शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी की गई वार्षिक  रैंकिंग में राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, बंजार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश भर में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

मनाली में आयोजित प्राचार्यों के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन (19-20 सितंबर) में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में शिक्षा सचिव तथा उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट (SAR) के आधार पर प्रदेश के सभी महाविद्यालयों की रैंकिंग जारी की गई। विदित हो कि यह मूल्यांकन प्रक्रिया यू.जी.सी. के नैक (NAAC) मूल्यांकन प्रणाली की तर्ज पर सात अलग-अलग मापदंडों पर महाविद्यालयों की गतिविधियों तथा वहां कार्यरत प्राध्यापकों की उपलब्धियों की गहन समीक्षा करती है। प्रदेश के समस्त राजकीय तथा संस्कृत महाविद्यालय अपनी स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट (SAR) उच्च शिक्षा निदेशालय को प्रस्तुत करते हैं. जिसके आधार पर प्रदेश भर के महाविद्यालयों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर प्राप्तांकों तथा समग्र स्कोर (Overall Score) के अनुसार उनकी रैंकिंग तय की जाती है।

इसी क्रम में राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, बंजार ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर समग्र रैंकिंग (Overall Ranking) में प्रदेश के 142 महाविद्यालयों में 13वां स्थान हासिल किया, जबकि जिला कुल्लू के 6 महाविद्यालयों में महाविद्यालय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि महाविद्यालय, यहां के प्राध्यापकों एवं छात्रों के साथ-साथ समूचे बंजार क्षेत्र के लिए गर्व एवं हर्ष का विषय है। उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष (2024-25) की रैंकिंग में राजकीय महाविद्यालय, बंजार प्रदेश के 141 महाविद्यालयों में 43वें स्थान पर रहा था। इस दृष्टि से इस वर्ष की यह उपलब्धि महाविद्यालय के लिए एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।

महाविद्यालय के प्राचार्य ने इस उल्लेखनीय सफलता का श्रेय अपने प्राध्यापकों, IQAC के अध्यक्ष डॉ. रमेश यादव एवं उनके समर्पित सहयोगियों तथा विद्यार्थियों की अथक लगन एवं परिश्रम को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्र का अपेक्षाकृत छोटा महाविद्यालय भी अध्यापन की गौरवशाली परंपरा के बल पर बड़े-बड़े महाविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा कर उनसे आगे निकल सकता है।

हालांकि, प्राचार्य ने महाविद्यालय में लगातार घटती प्राध्यापकों की संख्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशा जताई कि यदि महाविद्यालय में रिक्त पड़े प्राध्यापकों एवं अन्य स्टाफ के पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं, तो महाविद्यालय का प्रदर्शन तथा उपलब्धियां भविष्य में और भी बेहतर हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *