सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू : 12 सितंबर
हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को वैध किए जाने के बाद अब इससे कपड़े, शॉल, हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों के साथ-साथ औषधियां तैयार की जाएंगी।
विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कुल्लू क्षेत्र में भांग की खेती मुख्य रूप से टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए की जाएगी।
उन्होंने कहा कि औषधीय प्रयोजनों के लिए भी अब भांग की खेती कानूनी तरीके से की जा सकेगी।
किसानों को इसके लिए बीज हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय तथा बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएंगे।
उन्होंने भांग की खेती को लेकर हो रही नकारात्मक प्रचार को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह नियंत्रित और लाइसेंस आधारित प्रक्रिया होगी।
विधायक ने बताया कि सामान्य खेती के लिए एक बीघा भूमि पर 500 रुपये, जबकि औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये फीस निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गठित सर्वदलीय कमेटी ने देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर भांग की खेती से जुड़े कानूनी प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन किया।
अध्ययन के बाद कमेटी ने सर्वसम्मति से सीमित क्षेत्रों में भांग की खेती की अनुमति देने का निर्णय लिया।
विधायक ने कहा कि भांग की खेती को नियंत्रित तरीके से बढ़ावा देने का उद्देश्य इसके औद्योगिक और औषधीय उपयोग को प्रोत्साहित करना है, ताकि किसानों को भी इससे आय के नए अवसर मिल सकें।









