साहित्य जगत : बाल साहित्य लेखन अति कठिन कार्य – राहुल कुमार

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सुरभि न्यूज़

त्रिपाठी कौर मुसाफिर, चांदपुर/बिलासपुर।

कल्याण कला मंच बिलासपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार से भेंट कर उन्हें कुशल प्रशासन के लिए सम्मानित किया। मंच के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को सरस्वती माता की दिव्य चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा साहित्यिक गतिविधियों से अवगत करवाया।

मंच के सुरेन्द्र मिन्हास के नेतृत्व में अमरनाथ धीमान, जीत राम सुमन, हुसैन अली और शिवनाथ सहगल ने उपायुक्त राहुल कुमार से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मंच की ओर से हाल ही में प्रकाशित बाल कविता संग्रह ‘रंग-बिरंगे फूल’ की प्रति उपायुक्त को भेंट की।

पुस्तक के संपादक सुरेन्द्र मिन्हास ने उपायुक्त को जानकारी देते हुए बताया कि ‘रंग-बिरंगे फूल’ बाल कविता संग्रह में मंच से जुड़े 30 बाल कविता लेखकों की तीन-तीन कविताओं को स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संग्रह का उद्देश्य बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि पैदा करना और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना है।

उपायुक्त राहुल कुमार ने बाल कविता संग्रह में विशेष रुचि दिखाई और इसके प्रकाशन के लिए कल्याण कला मंच के सदस्यों तथा संपादक मंडल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साहित्य लेखन अपने आप में कठिन कार्य है, लेकिन बाल साहित्य लिखना उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि बच्चों की मनोवृत्ति, उनकी भाषा और उनकी रुचियों को ध्यान में रखते हुए सहज एवं रोचक रचना तैयार करनी पड़ती है।

उपायुक्त ने कल्याण कला मंच के प्रयासों की सराहना करते हुए मंच के सदस्यों को बिलासपुर की कला, संस्कृति, इतिहास और यहां के विशिष्ट व्यक्तित्वों से संबंधित साहित्य के लेखन और प्रकाशन की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति से जुड़ी सामग्री आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित हो सकती है।

इस अवसर पर मंच के सदस्यों ने उपायुक्त को बताया कि कल्याण कला मंच शीघ्र ही ‘बिलासपुर के व्यक्तित्व’ नामक पुस्तक का प्रकाशन करने जा रहा है। इस पुस्तक के माध्यम से बिलासपुर से जुड़े महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों के योगदान और जीवन से संबंधित जानकारी को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

कल्याण कला मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि मंच साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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