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डाक टिकटों में सिमटा इतिहास, विरासत और हिमाचल का वैभव

डाक टिकट भले ही आकार में छोटे हों, लेकिन अपने भीतर किसी दौर का इतिहास, समाज की स्मृतियां, संस्कृति की पहचान और देश की उपलब्धियों का बड़ा आख्यान समेटे होते हैं। फिलेटली इसी छोटे से कागजी संसार को पढ़ने, सहेजने और समझने का शौक है, जो बीते समय को संग्रहालय की अलमारियों में नहीं, बल्कि लोगों की जिज्ञासा और स्मृति में जीवित रखता है। शिमला डाक मंडल की ओर से आयोजित दो दिवसीय सिमपैक्स-2026 ने डाक टिकटों और डाक सामग्री के इसी ज्ञान-संसार को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया।

शिमला, 2 अक्तूबर। ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में 29 और 30 सितंबर को आयोजित सिमपैक्स-2026 में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के साथ युवा और स्कूली बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रदर्शनी में शिमला के प्रमुख फिलेटलिस्टों द्वारा सजाए गए करीब 58 फ्रेम में टिकटों, आवरणों और प्रथम दिवस आवरणों (एफडीसी) के माध्यम से भारत के इतिहास, संस्कृति, विरासत और उपलब्धियों की विविध झलक देखने को मिली। इनमें स्वतंत्रता-पूर्व काल की डाक सामग्री भी शामिल रही।

प्रदर्शनी का शुभारंभ पहले दिन एजी सुशील ठाकुर ने किया। इस अवसर पर विशेष आवरण भी जारी किया गया। प्रदर्शित संग्रहों में रक्षा, भारत के जीआई टैग, भारतीय संस्कृति एवं विरासत, भारत रत्न सम्मानित व्यक्तित्व, महात्मा गांधी, फ्रीमेसनरी, हिमाचल प्रदेश का इतिहास, गुलाब, महिलाओं की भूमिका, हिमालय के चित्र पोस्टकार्ड, संविधान का महत्व, विचित्र आकार के डाक टिकट, संयुक्त निर्गम, हिमाचल के विद्यालय और शिमला का इतिहास जैसे विषयों ने फिलेटली के व्यापक संसार को सामने रखा।

प्रदर्शनी को केवल संग्रहकर्ताओं तक सीमित न रखते हुए स्कूली बच्चों के लिए स्टांप डिजाइन, डिक्लेमेशन और क्विज जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन गतिविधियों ने डाक टिकटों को बच्चों के लिए महज संग्रह की वस्तु के बजाय इतिहास, कला, सामान्य ज्ञान और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने वाले माध्यम में बदल दिया।

प्रदर्शनी के दूसरे दिन प्रतिभागियों के संग्रह और उनकी फिलेटलिक प्रस्तुतियों को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्कूली बच्चों की श्रेणी में दयानंद पब्लिक स्कूल, शिमला ने प्रथम स्थान हासिल किया। युवा वर्ग में पृथा ने प्रथम, गौरी चांदला ने द्वितीय और प्रज्ञा कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ वर्ग में नीलम चंदेल ने तीन श्रेणियों—जनरल कलेक्शन (General Collection), फर्स्ट डे कवर (First Day Cover) और ओपन फिलेटली (Open Philately)—में प्रथम पुरस्कार हासिल किए। वहीं स्मृति राणा ने थीमैटिक (Thematic) श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इस बार फिलेटलिस्ट रितु कालड़ा ने आमंत्रित वर्ग (Invitee Class) में अपने प्रदर्श (Exhibits) लगाए, जिससे प्रदर्शनी में संग्रहों की विविधता और बढ़ी।

दूसरे दिन सीपीएमजी संजय सिंह और निदेशक डाक सेवाएं ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रतिभागियों को उनके संग्रह और योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर स्नो लेपर्ड पर विशेष आवरण, इनक्रेडिबल हिमाचल पर 12 पोस्टकार्ड तथा हिमाचल के राज्य पक्षी जुजुराना (वेस्टर्न ट्रैगोपन) पर चित्र पोस्टकार्ड भी जारी किया गया।

सिमपैक्स-2026 ने यह रेखांकित किया कि फिलेटली बीते समय को जमा करने का शौक भर नहीं, बल्कि समय की स्मृतियों को पढ़ने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की एक जीवंत विधा है। छोटे-छोटे डाक टिकटों और पोस्टकार्डों में सिमटी बड़ी कहानियों ने दो दिनों तक शिमला में इतिहास, संस्कृति, प्रकृति और राष्ट्रीय पहचान को एक साझा मंच प्रदान किया।

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