सुरभि न्यूज़
शुशांत शर्मा, कुल्लू
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने मानसिक स्वास्थ्य को आज दुनिया के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का मूल स्वभाव दयालुता, प्रेम, करुणा और आनंद है। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में हिंसा या करुणा का अभाव दिखाई देता है, तो उसके पीछे कोई न कोई गहरा कारण अवश्य होता है।
गुरुदेव ने कहा कि कोई भी बच्चा बिना कारण नहीं रोता। भूख, नींद या भय जैसी परिस्थितियां उसके रोने का कारण बनती हैं। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति हिंसक व्यवहार करता है अथवा उसमें करुणा का अभाव दिखाई देता है, तो उसके पीछे अकेलापन, भय, अस्वीकृति की भावना या अपनेपन का अभाव जैसी भावनाएं हो सकती हैं। समस्या की वास्तविक जड़ तक पहुंचने के लिए इन भावनात्मक कारणों को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बीमार होता है, तो उसे अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन जब उसके व्यवहार में विकृति आती है तो उसे जेल भेज दिया जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे लोगों को केवल दंड देने के बजाय अपनी भावनाओं और व्यवहार को समझने तथा उसमें सकारात्मक परिवर्तन लाने के साधन भी उपलब्ध कराए जाएं।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने मानसिक स्वास्थ्य को वैश्विक स्तर पर गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि विकासशील और विकसित देशों के साथ-साथ युद्धग्रस्त तथा शांतिपूर्ण समाज भी इससे प्रभावित हैं। उन्होंने युवाओं में बढ़ती आक्रामकता, हिंसा और अवसाद को चिंताजनक स्थिति बताया।
उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में दुनिया की सहायता कर सकती है। उनके अनुसार, समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को अपनी भावनाओं को समझने और संभालने की शिक्षा देना भी जरूरी है।
गुरुदेव ने कहा कि सामान्यतः न तो घर में और न ही विद्यालय में हमें अपनी भावनाओं को संभालना सिखाया जाता है। व्यक्ति के पास परिवार, मित्र और धन होने के बावजूद वह भीतर से अकेलापन या उदासी महसूस कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य के संकट में अकेलापन एक महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आ रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि हमने स्वयं के साथ रहना और अपने भीतर शांत रहना सीखा ही नहीं। यदि व्यक्ति अपने भीतर शांति और आनंद का अनुभव करना सीख ले, तो उसके भीतर की सकारात्मक ऊर्जा उसके आसपास के लोगों तक भी पहुंचने लगती है।
गुरुदेव ने श्वास को स्वस्थ मन की महत्वपूर्ण कुंजी बताते हुए कहा कि भावनाओं और श्वास के बीच गहरा संबंध है। उदासी, प्रसन्नता, क्रोध या निराशा की स्थिति में हमारी श्वास का स्वरूप बदल जाता है।
उन्होंने स्वस्थ मन के लक्षण बताते हुए कहा कि व्यक्ति के चेहरे पर ऐसी मुस्कान होनी चाहिए जिसे कोई उससे छीन न सके और भीतर ऐसा आत्मविश्वास होना चाहिए कि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सके। स्वस्थ मन आलोचना को स्वीकार करने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर स्वस्थ और रचनात्मक आलोचना करने का साहस भी रखता है। निर्भयता के साथ विनम्र बने रहना भी स्वस्थ मन की पहचान है।
भावनाओं पर नियंत्रण के लिए ध्यान और श्वास तकनीक उपयोगी
गुरुदेव ने कहा कि जब व्यक्ति क्रोध, निराशा या ईर्ष्या जैसी भावनाओं से घिर जाता है, तो अक्सर उसे समझ नहीं आता कि इन भावनाओं से कैसे निपटा जाए। ऐसे में व्यक्ति उन्हें अपने भीतर दबाए रखता है। उन्होंने श्वास पर ध्यान देने को सरल और प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि नियमित अभ्यास व्यक्ति को अपनी भावनाओं और मन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता कर सकता है।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने सरल श्वास तकनीकों और ध्यान को अपनाया है। उनके अनुसार, सुदर्शन क्रिया जैसी तकनीकों ने अनेक लोगों को निराशा और चिंता से उबरने में सहायता की है।
गुरुदेव ने कहा कि इन तकनीकों का उद्देश्य व्यक्ति को अपने मन का स्वामी बनाना है, न कि अपने ही मन की भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का शिकार बने रहना। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, भावनाओं की समझ, ध्यान और श्वास के अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मकता, आत्मविश्वास और आनंद को मजबूत कर सकता है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का संदेश भी यही है कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही गंभीरता से लिया जाए और व्यक्ति को उसकी भावनाओं को समझने, स्वीकार करने तथा सकारात्मक दिशा देने के लिए उचित वातावरण और सहयोग उपलब्ध कराया जाए।











