अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में दिखेगा वैश्विक संस्कृति और लोक कला का संगम – सुंदर सिंह ठाकुर

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सुरभि न्यूज़

कुल्लू, 15 अक्तूबर

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 इस बार वैश्विक संस्कृति, लोक परंपराओं और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अनूठे संगम का गवाह बनेगा। 21 से 27 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले इस उत्सव में देश-विदेश के कलाकार अपनी कला और संस्कृति की छटा बिखेरेंगे। उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस बार दशहरा उत्सव को पहले से अधिक भव्य, आकर्षक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

गुरुवार को लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि कला केंद्र का नवीनीकरण निर्धारित समय में पूरा कर लिया गया है। उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कला केंद्र के नए स्वरूप से कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा और दर्शक विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद उठा सकेंगे।

15 से 20 देशों के कलाकारों के आने की संभावना

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परिषद के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद करीब 15 से 20 देशों के कलाकारों के कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक केंद्रों से भी कलाकार आमंत्रित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस बार उत्सव में विशेष सामूहिक नृत्य प्रस्तुति तैयार की जा रही है, जिसमें विदेशी कलाकार कुल्लू की पारंपरिक लोक धुनों पर थिरकते नजर आएंगे। इस प्रस्तुति के माध्यम से विदेशी, राष्ट्रीय और स्थानीय कलाकारों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक एकता और विविधता का संदेश दिया जाएगा। इसके लिए नृत्य का विशेष संयोजन किया जा रहा है।

विधायक ने कहा कि उत्सव में कई नए आकर्षण देखने को मिलेंगे। स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएंगे, ताकि हिमाचल की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान मिल सके।

347 देवी-देवताओं को भेजे गए निमंत्रण

विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कुल्लू दशहरा की सबसे बड़ी पहचान यहां की समृद्ध देव परंपरा है। इस वर्ष उत्सव में भाग लेने के लिए 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि उत्सव समिति और जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि देवी-देवताओं के साथ आने वाले देवलुओं, गुरों और पुजारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। देव समाज की परंपराओं, आवश्यकताओं और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि सदियों पुरानी देव संस्कृति का निर्वहन गरिमापूर्ण तरीके से हो सके।

सुरक्षा, रोशनी और स्वच्छता पर रहेगा विशेष ध्यान

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि दशहरा उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

उन्होंने बताया कि भूतनाथ पुल से शास्त्री नगर, गांधीनगर और बाबा बालक नाथ मंदिर सहित शहर के प्रमुख क्षेत्रों में रोशनी और सजावट की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही उत्सव स्थल और शहर में साफ-सफाई बनाए रखने पर भी विशेष जोर रहेगा।

उन्होंने कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए केवल साज-सज्जा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता और आम लोगों की सुविधा सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है। उन्होंने मीडिया से उत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियों, लोक विरासत और व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि पत्रकारों और स्थानीय लोगों से मिलने वाले सुझावों को भी महत्व दिया जाएगा।

समिति की आय 6.5 करोड़ से बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये

विधायक ने बताया कि वर्ष 2023 में उनकी अध्यक्षता में आयोजित दशहरा उत्सव के दौरान उत्सव समिति की आय लगभग 6.5 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि आय में वृद्धि के साथ उत्सव की व्यवस्थाओं और सुविधाओं पर होने वाले खर्च में भी बढ़ोतरी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग उत्सव को बेहतर बनाने और देवी-देवताओं, देवलुओं, गुरों तथा पुजारियों सहित संबंधित वर्गों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किया जा रहा है। देव समाज की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए आयोजन को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र बनेगा प्रमुख आकर्षण

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र इस बार दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। यहां स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और रंगारंग प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। वैश्विक सामूहिक नृत्य प्रस्तुति के लिए भी विशेष मंच तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि स्थानीय लोक संस्कृति, देश के विभिन्न राज्यों की परंपराओं और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव को नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और देव परंपरा का प्रतीक है। सभी विभागों, कलाकारों, देव समाज, मीडिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से इस वर्ष का उत्सव भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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