सुरभि न्यूज़
परस राम भारती, बंजार
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला अपनी बर्फ से ढकी चोटियों, कल-कल बहती नदियों, झर-झर करते झरनों, शांत झीलों, घने जंगलों और मनोरम वादियों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। अब कुल्लू-मनाली तक सीमित पर्यटन धीरे-धीरे पूरे जिले में फैल रहा है, जिससे नए-नए प्राकृतिक स्थल सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इन्हीं में से एक है बंजार उपमंडल की रमणीय तीर्थन घाटी, जहाँ प्रकृति का असली, शांत और अद्भुत स्वरूप देखने को मिलता है।
हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा के बाद तीर्थन घाटी में पर्यटन गतिविधियाँ धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं। अब यहां आने वाले पर्यटक केवल विश्राम ही नहीं, बल्कि कुछ नया देखने और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर रोमांचक अनुभव प्राप्त करने के लिए भी उत्सुक नजर आ रहे हैं।
विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के लिए प्रसिद्ध तीर्थन घाटी के ऊँचे पहाड़ों पर छोटी-बड़ी नदियों, नालों, झरनों, झीलों और खड्डों का विस्तृत जाल फैला हुआ है। भीड़-भाड़ और शोरगुल से दूर इन प्राकृतिक स्थलों तक पहुँचने के लिए सैलानियों को कठिन पहाड़ी पगडंडियों पर पैदल सफर करना पड़ता है, लेकिन यहाँ का अनुपम सौंदर्य हर थकान को भुला देता है।
इन्हीं दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच छिपे एक गुमनाम झरने का सौंदर्य इन दिनों पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है। ऊँचाई से गिरता झरने का निर्मल दूधिया जल और उसकी सुरमयी धाराएँ मन और मस्तिष्क को अद्भुत शांति प्रदान करती हैं। झरने की कल-कल करती आवाज़ प्रकृति के साथ एकात्म होने का अहसास कराती है।
तीर्थन घाटी की दूरदराज ग्राम पंचायत श्रीकोट में भी कई ऐसे सुंदर और अनछुए स्थल मौजूद हैं, जहाँ अब तक बहुत कम सैलानी पहुँच पाए हैं। पंचायत के अंतर्गत प्राचीन गांव शनाड, शपनील, अनाह, कनौन और हुरी, साथ ही सराची छो, भरयाडा छो और गलयाडा छो जैसे प्राकृतिक झरने स्थित हैं। स्थानीय भाषा में झरनों को “छो” कहा जाता है और ये स्थल स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़े पवित्र और धार्मिक महत्व भी रखते हैं।
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के बफर ज़ोन श्रीकोट के ऊँचे पहाड़ों से वेगपूर्वक बहता इन झरनों का शीतल और निर्मल जल पर्यटकों को गहरी आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। अब ग्राम पंचायत कलवारी से सटी दूरदराज पंचायत श्रीकोट की वादियों में भी पर्यटकों की आमद बढ़ने लगी है। भरयाडा छो और गलयाडा छो झरने, जो कलवारी और श्रीकोट पंचायत की सीमा पर स्थित हैं, तेजी से सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह बनते जा रहे हैं।
हालांकि, इन सुंदर स्थलों तक पहुँचने वाले रास्तों की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। यदि भविष्य में सड़क और पैदल मार्गों में सुधार किया जाए, तो तीर्थन घाटी के ये गुमनाम झरने पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकते हैं।












