एनएचपीसी द्वारा आवासीय परिसर फरीदाबाद में वसंत उत्सव – 2026 का बड़े धूम-धाम किया आयोजन

Listen to this article

सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट, फरीदाबाद

एनएचपीसी, भारत की 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी द्वारा दिनांक 22.02.2026 को एनएचपीसी आवासीय परिसर, फरीदाबाद में ‘वसंत उत्सव 2026’ बड़े धूम-धाम से मनाया गया। उत्सव का उद्घाटन भूपेन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी तथा शिखा गुप्ता, अध्यक्षा, एनएचपीसी महिला कल्याण समिति द्वारा किया गया। एनएचपीसी द्वारा वसंत ऋतु के दौरान भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से वसंत उत्सव मनाया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक महोदय ने उपस्थितजनों को शुभकामनाएं दी तथा और कहा कि वसंत ऋतु हमारे जीवन में नई ऊर्जा, नई उमंग और नई आशा का संचार करती है। सर्दियों की ठिठुरन के पश्चात जब मौसम सुहावना हो जाता है, खेतों में फसलें लहलहाने लगती हैं, वृक्षों पर नई कोपलें फूटती हैं और चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिल उठते हैं, तब प्रकृति हमें यह संदेश देती है कि परिवर्तन ही जीवन का आधार है और प्रत्येक ठहराव के बाद आगे बढ़ना ही प्रगति का मार्ग है।

अपने सम्बोधन में गुप्ता ने एनएचपीसी की निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा भविष्य की योजनाओं के बारे में भी उल्लेख किया और कहा कि पिछला वर्ष एनएचपीसी के लिए उपलब्धियों और बदलाव का वर्ष रहा है। हमने न केवल अपने लक्ष्यों को पूरा किया है, बल्कि कई मामलों में उससे आगे बढ़कर उत्कृष्ट प्रदर्शन भी किया है।

वसंत उत्सव के दौरान भूपेन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी, शिखा गुप्ता, अध्यक्षा, एनएचपीसी महिला कल्याण समिति, उत्तम लाल, निदेशक (कार्मिक), संजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं), सुप्रकाश अधिकारी, निदेशक (तकनीकी) तथा एनएचपीसी महिला कल्याण समिति की सदस्याएं मोना लाल, गरिमा सिंह तथा सोमा उपस्थित रहे।

इस उत्सव में मथुरा के स्थानीय कलाकारों द्व्रारा लोकगीत-संगीत तथा लोक नृत्य का प्रदर्शन किया गया जिनकी शानदार प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस उत्सव में जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम आदि विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु एनएचपीसी पावर स्टेशनों/परियोजनाएं/क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा स्टाल भी लगाए गए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *