छोटाभंगाल व चौहार घाटी के घुमंतू भेड़पालकों ने पशुधन के साथ मैदानी इलाकों से पहाड़ों की तरफ किया पलायन

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सुरभि न्यूज़

ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट

गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही छोटाभंगाल व चौहार घाटी के घुमंतू भेड़पालकों ने पशुधन के साथ मैदानी इलाकों से घाटियों में पलायन करना शुरू कर दिया है। छोटाभंगाल के भेड़पालक सीरिया राम ने बरोट में मीडिआ को बताया कि वे प्रतिवर्ष की भान्ति इस बार भी सर्दी का सीजन काटने के लिए परमाणू, बद्दी व नालागढ़ स्थानों में अपने पंजीकृत जंगलों में भेड़ – बकरियों को  चराने के लिए गए थे। अब वहां पर गर्मी बढ़ जाने के चलते लगभग छः माह बाद अपने ठंडे क्षेत्र में फिर से लौट आए हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बार यहाँ लौटने की पहल की है और दूरदराज़ के जंगलों में अपनी भेड़ बकरियों को चराने के लिए ले जायेंगे। छोटाभंगाल के अन्य सभी घुमंतू भेड़पालक भी अपना समय देखकर धीरे – धीरे यहाँ पर पहुँच जाएंगे। सीरिया राम ने बताया कि अब वे यहाँ आकर एक डेढ़ माह तक अपने क्षेत्र छोटाभंगाल में अपनी चारागाहों में अपनी भेड़- बकरियों को रखेंगे तथा उसके बाद लगभग अस्सी किलोमीटर दूर दुर्गम बड़ा भंगाल में अपनी चारागाहों में चार – पांच माह तक भेड़ -बकरियों को रखने के बाद सर्दी की दस्तक होने पर वहां से उतरकर ही फिर से मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन करेंगे।

गौरतलव है की पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। ऐसे में वहां भेड़ बकरियों के लिए रहना नामुमकिन हो जाता है। यही कारण है कि वे सर्दी के दौरान मैदानी क्षेत्रों में पलायन करते हैं और वहां पर गर्मी शुरू होते ही पहाड़ों पर लौटने लगते हैं। गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर हरियाली रहती है और भेड़- बकरियों के लिए चारे की भी कमी नहीं होती है। मैदानी इलाकों में इतनी अधिक गर्मी होती है जिसे भेड़ बकरियों के लिए सहन करना कठिन होता है। यही कारण है कि हर ऋतु बदलने के साथ भेड़पालक भेड़ बकरियों के साथ पलायन करते रहते हैं। भेड़पालक सीरिया राम ने बताया कि भेड़ पालकों का जीवन काफी कठिन होता है।

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