सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, केलांग : 04 अगस्त
हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा जिला मुख्यालय केलांग में पहली बार राज्य स्तरीय साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार के व्यक्तित्व, कृतित्व और प्रदेश निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर डॉ. परमार के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए समाज और प्रदेश निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के पहले सत्र में लेखक संगोष्ठी एवं परिचर्चा आयोजित की गई। लोक संस्कृति एवं इतिहास के विद्वान डॉ. सूरत ठाकुर ने ‘डॉ. यशवंत सिंह परमार का ग्रामीण विकास एवं भूमि सुधार में योगदान’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि डॉ. परमार ने ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने सड़क संपर्क को विकास की रीढ़ मानते हुए वर्ष 1948 में 228 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क को बढ़ाकर वर्ष 1977 तक लगभग 12 हजार किलोमीटर तक पहुंचाया और बजट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा सड़क निर्माण पर खर्च किया।
शोधपत्र में यह भी बताया गया कि डॉ. परमार ने पझौता और सुकेत आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई, जेलदारी प्रथा समाप्त की, किसानों के लिए नई ऋण व्यवस्था लागू की तथा बागवानी, पर्यटन, शिक्षा, वानिकी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को नई दिशा दी। सामाजिक सुधारों के तहत उन्होंने विधवा पेंशन जैसी महत्वपूर्ण पहल कर कमजोर वर्गों के कल्याण की मजबूत नींव रखी।
वक्ताओं ने कहा कि 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल की 30 रियासतों के एकीकरण और 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में डॉ. परमार का नेतृत्व निर्णायक रहा। इसी कारण उन्हें आधुनिक हिमाचल का शिल्पकार कहा जाता है। संगोष्ठी में वांगचुक शास्त्री, प्रो. राजकुमार, अजेय, सतीश लोपा तथा केंद्रीय विद्यालय की छात्राओं पुष्पी ताग्मा और डिम्पल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. महेश शर्मा ने किया।
दूसरे सत्र में प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. गंगा राम राजी की अध्यक्षता में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों दीपक शर्मा, गणेश गनी, तारा नेगी, विनोद कुमार भावुक, रविंद्र ठाकुर, डॉ. सत्यनारायण स्नेही, रमेश चंद्र मरस्ताना, केहर सिंह ठाकुर (भुंपाली), प्रभात शर्मा, डॉ. महेश शर्मा, अरुण डोगरा, वैशाली विष्ट, देवयानी और यांगचेन निर्मला देवी सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं से हिमाचल की संस्कृति, लोक परंपराओं, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। मंच संचालन डॉ. रमेश चंद्र मरस्ताना ने किया।
समारोह की मुख्य अतिथि उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने डॉ. वाई.एस. परमार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, सेवा और दूरदर्शिता का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, अपने करियर के प्रति गंभीर रहने तथा पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हिमाचल के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
समारोह में जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, अकादमी के अनिल कुमार, रविन्द्रनाथ, अमर सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन लाहौल-स्पीति को साहित्य, संस्कृति और वैचारिक संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।











