रंगमंच : कुल्लू में नाटक “मैं मनोहर सिंह हूँ” का सफल मंचन: प्रसिद्ध अभिनेता के जीवन और अभिनय यात्रा को केहर सिंह ठाकुर ने मंच पर किया जीवंत 

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सुरभि न्यूज़ 

प्रताप अरनोट, कुल्लू : 09 अगस्त 

कुल्लू। स्थानीय संस्था ‘ऐक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन’ कुल्लू द्वारा भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र में प्रसिद्ध नाटक “मैं मनोहर सिंह हूँ” का शानदार मंचन किया गया। रंगमंच के विख्यात अभिनेता स्व. मनोहर सिंह के अभिनय जीवन पर आधारित इस नाटक का निर्देशन एवं एकल अभिनय प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर ने किया। अपने परिपक्व अभिनय से उन्होंने दर्शक दीर्घा में मौजूद हर व्यक्ति को कभी भाव-विभोर किया तो कभी अचंभित कर दिया।

यह नाटक मनोहर सिंह द्वारा विभिन्न कालजयी नाटकों में निभाए गए किरदारों और उनकी तैयारी की यात्रा को परिलक्षित करता है। इसमें उनके गुरु इब्राहिम अलकाज़ी द्वारा उनके निधन पर कहे गए शब्दों का भी समावेश किया गया।

कालजयी किरदारों की झलक और हिमाचल से जुड़ाव नाटक की शुरुआत ‘आधे अधूरे’ नाटक के ‘काले सूट वाले आदमी’ की प्रसिद्ध स्पीच से हुई, जिसे मूल रूप से मनोहर सिंह ने निभाया था। इसके अतिरिक्त, ‘किंग लियर’ और ‘तुग़लक़’ जैसे प्रसिद्ध नाटकों की कहानियों तथा उनके किरदारों को गढ़ने की प्रक्रिया को मंच पर बखूबी व्याख्यायित किया गया।

विशेष रूप से, नाटक के सूत्रधार के रूप में केहर सिंह ठाकुर ने बताया कि मनोहर सिंह को ‘हिम्मत माई’ के महिला किरदार को तैयार करने में किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। अंततः अपने गृह राज्य हिमाचल की महिलाओं को ध्यान में रखकर उन्होंने यह किरदार तैयार किया, जिसकी सर्वत्र सराहना हुई।

रंगमंच पद्धतियों और प्रासंगिकता पर चर्चा नाटक में दुनिया भर की प्रमुख अभिनय पद्धतियों और अभिनेता की तैयारी के तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया। नाटक के संवादों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि लोक रंगमंच का अभिनेता एक ‘संपूर्ण अभिनेता’ होता है, क्योंकि वह गायन, शारीरिक गतियों और मुद्राओं सहित अभिनय के सभी आयामों में परिपूर्ण होता है।

नाटक के समापन पर रंगमंच से जुड़े एक गंभीर विषय पर चर्चा की गई कि अधिकतर रंगकर्मी फिल्मों और सीरियलों की ओर पलायन क्यों कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण रंगमंच में पर्याप्त आय और उस स्तर की प्रसिद्धि का न मिलना है।

मंच के पीछे के कलाकार इस सफल प्रस्तुति में मीनाक्षी ने वस्त्र व प्रकाश परिकल्पना संभाली, जबकि पार्श्व संगीत रेवत राम विक्की का था और संचालन परमानंद पिंकु ने किया। वैभव ठाकुर ने आलोक सहायक तथा आंचल ने सभी विभागों में सहायक के रूप में योगदान दिया।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति कार्यक्रम के दौरान दर्शक दीर्घा में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें शिक्षाविद् एवं साहित्यकार गणेश गन्नी, वरिष्ठ पत्रकार प्रताप अरनोट तथा पत्रकार देविंद्र ठाकुर ने विशेष रूप से शिरकत की और कलाकारों के प्रयास की जमकर सराहना की।

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