घेपन ग्लेशियल झील : आपदा से निपटने के लिए सितंबर में लगेगा ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’, 32 स्थानों पर होगी हाई फ्लड लेवल मार्किंग

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सुरभि न्यूज़ 

प्रताप अरनोट, केलांग (लाहौल स्पीति)

नेपाल में हाल ही में ग्लेशियर फटने के कारण हुई भारी तबाही को देखते हुए जिला लाहौल-स्पीति प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। समुद्र तल से 4,070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित संवेदनशील घेपन ग्लेशियल झील की स्थिति पर 24 घंटे नजर रखने के लिए सितंबर माह में ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित किया जाएगा। यह प्रणाली सी-डैक (C-DAC), तिरुवनंतपुरम द्वारा तैयार की जा रही है, जिसका सिस्सू झील पर सफल परीक्षण किया जा चुका है।

​उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना ने बताया कि घेपन झील के जलस्तर और अन्य मानकों की निरंतर निगरानी के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से अंतिम मंजूरी मिलते ही प्रणाली स्थापित कर दी जाएगी।

​झील से जुड़े संभावित खतरों का आकलन करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के 5 विशेषज्ञों की टीम 1 सितंबर से क्षेत्र का 14 दिवसीय वैज्ञानिक दौरा करेगी। यह टीम झील की गहराई, मैपिंग, जल प्रवाह, मौसम संबंधी आंकड़ों तथा हिमस्खलन और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपेगी। इसके अलावा, सितंबर माह में जिला प्रशासन की एक टीम भी स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने झील का दौरा करेगी।

​घेपन झील के संभावित फटने (GLOF) के खतरे से निपटने और नुकसान को न्यूनतम करने के लिए सिस्सू से जिले की अंतिम सीमा तक 34 संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है। संभावित बाढ़ के जलस्तर का स्पष्ट संकेत देने और लोगों को जागरूक करने के लिए 32 स्थानों पर स्थायी HFL मार्किंग की जा रही है।आपात स्थिति से निपटने के लिए सिस्सू और शाशिन गांव में ‘लोकल रैपिड रेस्पॉन्स टीम’ का गठन किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों और विभिन्न विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर आपदा प्रबंधन व बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

​आपदा जोखिम को कम करने के लिए जिला स्तर पर एक ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) मॉनिटरिंग कमेटी’ का गठन किया जा रहा है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ अनुभवी पर्वतारोहियों को शामिल किया जाएगा, जो समय-समय पर झील क्षेत्र का निरीक्षण कर अस्थिर भू-भाग और ढीली चट्टानों जैसे खतरों का आकलन करेंगे।

​गौरतलब है कि नवंबर 2023 में इसरो (ISRO) ने घेपन झील के तेजी से बढ़ते आकार को लेकर जिला प्रशासन को आगाह किया था। इसके बाद जुलाई 2024 में 23 अधिकारियों के दल ने झील का दौरा कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके आधार पर अब चरणबद्ध तरीके से सुरक्षात्मक और शमन उपाय लागू किए जा रहे हैं।

​उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य वैज्ञानिक निगरानी और अग्रिम तैयारियों के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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