‎कुल्लू के देवसदन में संगोष्ठी और हिंदी कवि सम्मेलन के साथ मनाया हिंदी दिवस

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सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट, कुल्लू

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को देवसदन कुल्लू में देवप्रस्थ साहित्य एवं कला संगम कुल्लू, जिला भाषा विभाग कुल्लू तथा हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी शिमला के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन ‌किया गया।

कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में हिमाचल प्रदेश की समाज संरचना में देवी-देवताओं की भूमिका नामक विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जबकि दूसरे सत्र में हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

देवप्रस्थ साहित्य एवं कला संगम कुल्लू के अध्यक्ष तोबदन ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा कि हिमाचल की देव संस्कृति यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार है।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि दानवेंद्र सिंह ने कहा कि देव परंपरा हिमाचल में संस्कारों और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ने की।

नेरी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. चेत राम ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां की देवी-देवता परंपरा ने समाज को आपसी सहयोग और सामुदायिक भावना के सूत्र में बांधे रखा है।

मुख्य शोधपत्र वाचक डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि देवयात्रा आपसी मेल-मिलाप और सामाजिक एकजुटता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के मेले और त्योहार केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से लोगों को मानसिक शांति और सामाजिक जुड़ाव भी मिलता है।

संगोष्ठी में तोबदन, हीरा लाल ठाकुर, सत्यदेव नेगी, राजेंद्र चौहान, कमल किशोर शर्मा, टीकम राम, केशव राम और देवेंद्र गौड़ सहित अन्य विद्वानों एवं साहित्यकारों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने हिमाचल की लोक परंपराओं, देव संस्कृति और सामाजिक संरचना के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध लोकगायक धर्मेंद्र शर्मा ने की। कवि सम्मेलन में मानवी शर्मा, चुनी लाल ठाकुर, वैशाली बिष्ट, पल्लवी ठाकुर और सोम प्यारे सहित कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को साहित्यिक रस से सराबोर किया।

अंत में जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने सभी विद्वानों, देव प्रतिनिधियों, साहित्यकारों एवं कवियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम ने हिंदी भाषा, साहित्य और हिमाचल की समृद्ध लोक-देव परंपरा के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए साहित्यप्रेमियों को एक सार्थक मंच प्रदान किया।

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