सुरभि न्यूज़
आनी, कुल्लू : 22 सितंबर
कुल्लू जिला के विकास खंड आनी में ‘बाजार सफलता एवं स्थिरता तथा उद्यमिता प्रशिक्षण’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों सहित 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने उत्पादों को बाजार में सफलतापूर्वक स्थापित करने, कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध आधुनिक अवसरों और तकनीकों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी चंद्र मोहन मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, राजकीय डिग्री कॉलेज आनी की सहायक प्राध्यापिका डॉ. राधिका नेगी ने मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षण सत्र संचालित किया।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राधिका नेगी ने प्रतिभागियों को ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग, ग्राहक जुड़ाव, बाजार की मांग की पहचान और आधुनिक उद्यमिता के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले उत्पादों में गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग और निरंतरता बनाए रखकर उन्हें प्रतिस्पर्धी बाजार में अलग पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उत्पादों में आवश्यक सुधार करना, प्रभावी ब्रांडिंग अपनाना और ग्राहकों की पसंद को समझना किसी भी छोटे उद्यम की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। स्थानीय उत्पादों को केवल तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही तरीके से प्रस्तुत कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने उद्यमिता एवं बाजार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की और अपने अनुभव भी साझा किए। प्रशिक्षण में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वरोजगार एवं व्यवसाय के नए अवसर तलाशने पर भी जोर दिया गया।
उद्योग विभाग की ओर से बताया गया कि RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance) योजना के अंतर्गत भविष्य में भी इस तरह की जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन जारी रखा जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों एवं व्यवसाय को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए आवश्यक जानकारी, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध करवाना है।
कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।











